US Marines killed Pakistani citizens: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत के बाद पाकिस्तान के कराची शहर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (US Consulate Pakistan) के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। सैकड़ों (कुछ रिपोर्ट्स में 500+) प्रदर्शनकारी, ज्यादातर शिया समुदाय से, दूतावास परिसर में घुसने की कोशिश की। उन्होंने दीवार तोड़ी, खिड़कियाँ तोड़ीं, गेट पर आग लगाई और नारेबाजी की।
स्थानीय पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेस ने बैरिकेड्स लगाए, आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। हिंसा बढ़ने पर अमेरिकी सुरक्षा कर्मियों (जिनमें US Marines शामिल हैं) ने भी फायरिंग की, जिससे प्रदर्शनकारियों में मौतें और घायल हुए।
Edhi Foundation (पाकिस्तान की प्रमुख रेस्क्यू सर्विस) के प्रवक्ता मुहम्मद अमीन के अनुसार, कम से कम 8 मौतें हुईं और 20+ लोग घायल हुए, ज्यादातर गोलियों से। कुछ रिपोर्ट्स में मौतों की संख्या 6 से 9 तक बताई गई है (जैसे Al Jazeera, Bloomberg, AP, France24)।
खामेनेई को क्यों मारा गया?
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई (86 वर्ष) की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त एयर स्ट्राइक्स में हुई। ईरानी स्टेट मीडिया (IRNA, Fars News आदि) ने इसकी पुष्टि की है।
यह स्ट्राइक्स ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर ऑपरेशन का हिस्सा थे, जिसे इज़राइल ने “Roar of the Lion” या इसी तरह का नाम दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर खामेनेई की मौत की घोषणा की और कहा कि यह “सबसे evil व्यक्ति” की मौत है, साथ ही ईरान में रिजीम चेंज की अपील की।
- ट्रंप ने कहा कि यह हमला ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, रिजनल थ्रेट्स और पिछले हमलों का जवाब था। इज़राइल ने भी पुष्टि की कि खामेनेई उनके ऑफिस में स्ट्राइक में मारे गए।
- ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया, बदला लेने की कसम खाई और इज़राइल/अमेरिका पर हमले किए (जैसे दुबई, दोहा में एक्सप्लोजन)।
पाकिस्तान में गुस्सा और राजनीतिक असर
प्रदर्शन ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इज़राइली हमलों और खामेनेई की मौत से जुड़े थे। पाकिस्तान में बड़ी शिया आबादी (खासकर कराची में) ने इसे “अमेरिकी साम्राज्यवाद” का हमला माना। कई सोशल मीडिया पोस्ट्स और रिपोर्ट्स से लगता है कि लोग प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ असीम मुनीर से नाराज हैं क्योंकि, पाकिस्तान सरकार ने अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखे हैं। पुलिस/सुरक्षा फोर्सेस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की (कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि पाकिस्तानी फोर्सेस ने पहले फायरिंग की, लेकिन अमेरिकी मारिन्स ने भी गोली चलाई)।पाकिस्तान ने ईरान के साथ बॉर्डर और संबंधों के बावजूद अमेरिका का साथ नहीं छोड़ा।
यह घटना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा रही है। पाकिस्तान में शिया-सुन्नी टेंशन, अमेरिका विरोध और ईरान समर्थन का मिश्रण खतरनाक साबित हो सकता है।

