पाक की मध्यस्थता या दलाली! ट्रंप के गुलाम बन गए शरीफ?

अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिनों से चल रही जंग के बाद 2 हफ्तों के लिए सीजफायर (US Iran Ceasefire) हो गया है। Donald Trump ने इस Ceasefire का क्रेडिट पाकिस्तान को दिया, जिसके बाद भारत की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत इस पूरे घटनाक्रम में निष्क्रिय रहा, जबकि पाकिस्तान ने खुद को Middle East Leader के रूप में पेश कर दिया।

Donald Trump ने अपने पोस्ट में कहा कि Shehbaz Sharif और Asim Munir ने उनसे संपर्क कर ईरान की ओर भेजी जा रही विनाशकारी ताकत को रोकने का अनुरोध किया।

यह बयान सामने आते ही पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई

दरअसल युद्ध विराम के कुछ ही घंटे पहले ट्रंप ने एक पोस्ट कर पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया था. उन्होंने कहा था कि आज की रात ईरान की पूरी सभय्ता मर जाएगी, ये पढ़कर पूरी दुनिया घबरा गई कि थी मैड किंग की तरह बर्ताव कर रहे ट्रंप कहीं पूरे ईरान को भस्म न कर दें. लेकिन सीजफायर के बाद यह पता चला कि ये कोई धमकी नहीं बल्कि गीदड़ भभकी थी.

अगर ट्रंप ईरान की पूरी सभ्यता खत्म करने की ठान चुके होते तो पाकिस्तान के कहने बस से सीजफायर नहीं कर देते। कोई सोच भी नहीं सकता कि डोनाल्ड ट्रंप जैसा शख्स पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शाहबाज शरीफ और फेल्ड मार्शल की बात मानेगा।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप भले मध्यस्थता का क्रेडिट पाकिस्तान को दे रहे हैं लेकिन पाकिस्तान मध्यस्थ नहीं मोहरा था. ट्रंप ने पाकिस्तान का इस्तेमाल करके अपनी लाज बचाने के लिए ईरान की 10 शर्तों पर सीजफायर किया है. जो देश ईरान की पूरी सभय्ता खत्म करने का एलान करे और बाद में ईरान कि शर्तें मानकर सीजफायर का एलान कर दें तो इसे जीत तो नहीं कहा जा सकता। यह अमेरिका के डर को दिखाता है और इसी डर को डैमेज कंट्रोल करने के लिए पाकिस्तान को मोहरा बनाया गया ताकि दुनिया को यह लगे कि ईरान ने ट्रंप की धमकी से डरकर पाकिस्तान के ज़रिये स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज खोलने का प्रस्ताव दिया।

लोगों का मानना है कि सभ्यता खत्म करने की धमकी देना फिर सीजफायर का एलान कर पाकिस्तान को क्रेडिट देना पूरा स्क्रिप्टेड प्लान था और ये स्क्रिप्ट इजराइल-अमेरिका ने लिखी जिसका एक्टर पाकिस्तान था. पाकिस्तान के प्रधान मंत्री द्वारा युद्ध विराम से जुड़ा एडिटेड X पोस्ट पढ़कर ये सवाल उठता है कि शाहबाज मध्यस्त की भूमिका निभा रहे थे या ट्रंप की गुलामी कर रहे थे.

शाहबाज शरीफ का Draft Post विवाद

Shehbaz Sharif के X अकाउंट से एक पोस्ट सामने आया, जिसमें Ceasefire बढ़ाने और Strait of Hormuz खोलने की अपील की गई थी। लेकिन विवाद तब बढ़ गया जब यह पता चला कि पोस्ट में गलती से “Draft- Pakistan’s PM Message on X” भी शामिल था, जिसे बाद में Edit कर हटा दिया गया।

लोग ये पोस्ट देखकर समझ गए कि ये पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के द्वारा या उनके किसी सलाहकार द्वारा लिखा गया पोस्ट नहीं बल्कि अमेरिका या इजराइल द्वारा भेजी गई स्क्रिप्ट थी. क्योंकी शाहबाज शरीफ ने धोखे से पूरा ड्राफ्ट मैसेज ही X में पोस्ट कर लिया जिसका टाइटल था ”ड्राफ्ट- पकिस्तानस पीएम मैसेज ऑन X

फिर इस पोस्ट को एडिट कर ये ड्राफ्ट वाली लाइन हटा दी गई. ड्रॉप साइट सबस्टैक के फाउंडर रयान ग्रिम ने पोस्ट कर लिखा कि- ये मैसेज पाकिस्तान के प्रधान मंत्री का नहीं है, क्योंकी उनका अपना स्टाफ उन्हें अगर कोई ड्राफ्ट पोस्ट लिखकर भेजेगा तो ये नहीं कहेगा कि- पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के लिए ड्राफ्ट, बल्कि वो सिर्फ प्रधान मंत्री के लिए ड्राफ्ट कहता। लेकिन इजराइल या अमेरिका की तरफ से जरूर पाकिस्तान का प्रधान मंत्री कहा जाएगा।

सोशल मीडिया सहित पूरे पाकिस्तान में शाहबाज शरीफ की इसी लिए नामूजी हो रही है. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की डिप्लोमेसी पाकिस्तान से नहीं चलती? पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के लिए X पोस्ट का ड्राफ्ट भी इजराइल और अमेरिका भेज रहे हैं. बहरहाल पाकिस्तान सरकार ने अबतक इसपर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है.

खैर 10 अप्रैल को पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के डेलिगेशन को इस्लामाबाद बुलाया गया है ताकी दोनों देशों के बीच फाइनल एग्रीमेंट पर बात हो सके. ये मीटिंग भी अमेरिका के आदेश के अनुसार होना मानी जा रही है. माना जा रहा है कि नोबेल पीस प्राइज़ का नॉमिनेशन करने के बाद ट्रंप शरीफ और मुनीर पर मेहरबान हैं और इसी लिए पाकिस्तान को मिडल ईस्ट का नेता बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि पाकिस्तान का रुतबा बढे और भारत की साख कमजोर पड़ जाए.


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