वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बार फिर बड़े संकट की ओर बढ़ती दिख रही है। ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के अड़ियल रुख ने US-EU Trade War की आशंकाओं को हवा दे दी है। यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित बड़े व्यापार समझौते को फिलहाल निलंबित करने का मन बना लिया है। इस फैसले के बाद अटलांटिक के दोनों ओर शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
ग्रीनलैंड विवाद और US-EU Trade War का नया मोड़
यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच पिछले साल जुलाई में जो व्यापारिक सहमति बनी थी, वह अब टूटने की कगार पर है। इस तनाव की मुख्य वजह ग्रीनलैंड को खरीदने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई कोशिशें हैं। ट्रंप ने बीते सप्ताहांत ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोप पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। जवाब में यूरोपीय संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने साफ कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में व्यापार समझौते को मंजूरी देना संभव नहीं है।
बर्नड लांगे, जो यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष हैं, ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की धमकियां व्यापारिक संबंधों की स्थिरता को कमजोर करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक अमेरिका सहयोग का रास्ता नहीं चुनता, तब तक विधायी प्रस्तावों पर काम रोकना ही एकमात्र विकल्प है।
वैश्विक शेयर बाजारों में हाहाकार
इस कूटनीतिक गतिरोध का सीधा असर वित्तीय बाजारों पर पड़ा है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल है, जिससे US-EU Trade War की संभावना और मजबूत हुई है। मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई, जहां डॉव जोन्स 1.7% और नैस्डैक लगभग 2.4% नीचे बंद हुआ।
यूरोपीय शेयर बाजारों में भी लगातार दूसरे दिन गिरावट का दौर जारी रहा। हालांकि, एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचा, तो वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक बढ़ी
जब भी दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टकराव बढ़ता है, निवेशक सुरक्षित ठिकानों की ओर भागते हैं। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें रिकॉर्ड $4,800 प्रति औंस के पार चली गई हैं। चांदी की कीमतों में भी पिछले एक साल में जबरदस्त उछाल आया है, हालांकि हालिया सत्रों में इसमें मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जब तक अमेरिका और यूरोप के बीच स्पष्टता नहीं आती, कीमती धातुओं में तेजी बनी रह सकती है।
क्या यूरोप चलाएगा अपनी ‘ट्रेड बजूका’?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) में अमेरिका के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। यूरोप अब अपने ‘एंटी-कोercion इंस्ट्रूमेंट’ या जिसे “ट्रेड बजूका” कहा जा रहा है, उसे सक्रिय करने पर विचार कर रहा है।
यूरोपीय संघ ने पिछले साल ही 93 अरब यूरो मूल्य के अमेरिकी सामानों की सूची तैयार की थी, जिन पर जवाबी टैक्स लगाया जा सकता है। यह योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में थी, लेकिन 7 फरवरी की समयसीमा नजदीक आने के साथ ही इसे लागू करने का दबाव बढ़ गया है।
ट्रंप प्रशासन की चेतावनी और भविष्य की राह
दूसरी तरफ, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने यूरोपीय नेताओं से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने दावोस में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही अपना पक्ष स्पष्ट करेंगे। हालांकि, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि यूरोप जवाबी कार्रवाई करता है, तो अमेरिका खामोश नहीं बैठेगा।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस विवाद पर अपनी राय दी है। उन्होंने ‘मिडल पावर्स’ यानी मध्यम शक्तियों को एकजुट होने की सलाह दी है। कार्नी के अनुसार, केवल द्विपक्षीय बातचीत में बड़ी शक्तियां अपना दबदबा बनाती हैं, जिससे छोटे देशों की संप्रभुता को खतरा पैदा होता है।
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