UP TGT-PGT Bharti : उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। प्रयागराज में TGT-PGT भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। कोई कफन ओढ़कर प्रदर्शन कर रहा है, तो कोई सड़क जाम करके सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। आंदोलन के चौथे दिन अभ्यर्थियों ने एकलव्य चौराहे पर चक्काजाम किया। इसके बाद जब वे शिक्षा निदेशालय वापस पहुंचे, तो पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आशुतोष पांडेय को भी हिरासत में लिया गया।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर बातचीत करने के बजाय प्रशासन उन्हें आंदोलन से रोक रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी के नवनिर्वाचित एमएलसी मान सिंह यादव भी अभ्यर्थियों के बीच पहुंचे और उनकी मांगों का समर्थन किया।
ऐसे में सवाल है कि आखिर TGT-PGT भर्ती में ऐसा क्या बदल गया है, जिसके खिलाफ युवा कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं? पुरानी नियमावली में ऐसा क्या था, जो नई नियमावली में नहीं है? और सरकार से आखिर अभ्यर्थी एक मौका क्यों मांग रहे हैं?
TGT और PGT क्या है?
TGT यानी ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर। आसान भाषा में कहें तो माध्यमिक स्तर पर शिक्षक बनने की भर्ती। वहीं PGT यानी पोस्ट ग्रेजुएट टीचर। इसके तहत इंटरमीडिएट यानी 11वीं और 12वीं कक्षाओं को पढ़ाने के लिए प्रवक्ताओं की नियुक्ति होती है। उत्तर प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में इन पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग यानी UPESSC के पास है।
लंबे समय से अभ्यर्थी इन भर्तियों का इंतजार कर रहे थे। लेकिन जब भर्ती की नई नियमावली और नई शैक्षिक अर्हताओं के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो विवाद खड़ा हो गया।
पुराने नियम और नए नियमों में क्या अंतर है?
इस विवाद की जड़ है 16 सितंबर 2025 को नियमों में किया गया बदलाव और उसके बाद निर्धारित की गई नई शैक्षिक योग्यताएं.. पहले की व्यवस्था में TGT और PGT के अलग-अलग विषयों के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता और प्रशिक्षण संबंधी अर्हताएं लागू थीं। कई विषयों में अभ्यर्थियों को स्नातक या परास्नातक के साथ निर्धारित प्रशिक्षण डिग्री के आधार पर आवेदन का अवसर मिलता था। यानी अभ्यर्थियों ने जिस विषय से पढ़ाई की, जिस विषय में डिग्री ली और जिस योग्यता को उस समय मान्यता थी, उसी के आधार पर शिक्षक भर्ती की तैयारी की।
लेकिन नई व्यवस्था में कई विषयों की शैक्षिक अर्हताओं को बदला गया है। कुछ विषयों में संबंधित विषय की डिग्री, विषय-संयोजन और शिक्षक प्रशिक्षण की शर्तों को अधिक स्पष्ट और सख्त किया गया है। यहीं से अभ्यर्थियों की परेशानी शुरू हुई।
शैक्षिक योग्यता और विषय की अनिवार्यता में बदलाव
पुरानी व्यवस्था के तहत कुछ विषयों में अलग-अलग शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर मिलता था। लेकिन नई अर्हताओं में विषय के हिसाब से डिग्री और उसके संयोजन को ज्यादा महत्व दिया गया है। मतलब हिंदी, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, संगीत, गृह विज्ञान, शारीरिक शिक्षा और प्राविधिक कला जैसे विषयों में अर्हताओं को लेकर विवाद सामने आया है।
कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पुरानी नियमावली के अनुसार डिग्री हासिल की थी। उस समय उनकी योग्यता शिक्षक भर्ती के लिए मान्य थी, लेकिन अब नई शर्तों के कारण वे आवेदन के योग्य नहीं रह गए हैं। यानी डिग्री वही है, पढ़ाई वही है, लेकिन भर्ती के नियम बदलने से पात्रता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बीएड और शिक्षक प्रशिक्षण अनिवार्य
इस विवाद में बीएड की योग्यता भी एक बड़ा मुद्दा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पुरानी नियमावली में कुछ विषयों और पदों के लिए ऐसी शैक्षिक योग्यताएं मान्य थीं, जिनके आधार पर बिना बीएड वाले अभ्यर्थियों को भी अवसर मिल सकता था। लेकिन नई व्यवस्था में कई पदों के लिए NCTE से मान्यता प्राप्त शिक्षक प्रशिक्षण योग्यता की शर्त लागू की गई है। इसका असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है, जिन्होंने पुरानी व्यवस्था के भरोसे अपनी पढ़ाई पूरी की और अब नई अर्हताओं के कारण आवेदन से बाहर होने की आशंका जता रहे हैं।
आवेदन करने के लिए TET और CTET को अनिवार्य करना
TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा और CTET यानी केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा। नई TGT भर्ती की पात्रता में निर्धारित स्तर की शिक्षक पात्रता परीक्षा की शर्त भी महत्वपूर्ण है। विज्ञापन में निर्धारित योग्यता के अनुसार अभ्यर्थियों को संबंधित TET/CTET की शर्त पूरी करनी होगी। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि TGT और PGT की योग्यता एक जैसी नहीं होती। दोनों पदों के लिए अलग-अलग अर्हताएं और विषयवार शर्तें हैं। इसलिए TET को दोनों भर्तियों के लिए एक समान अनिवार्यता बताना सही नहीं होगा।
अभ्यर्थियों की आपत्ति यह है कि पुरानी व्यवस्था के अनुसार तैयारी करने वाले युवाओं को नई शर्तों के कारण अचानक अतिरिक्त परीक्षा और योग्यता की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
परीक्षा के पैटर्न में बदलाव
सिर्फ डिग्री और पात्रता ही नहीं, परीक्षा के स्वरूप को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। नई व्यवस्था में परीक्षा के प्रारूप, सामान्य अध्ययन और नेगेटिव मार्किंग जैसे प्रावधानों को लेकर अभ्यर्थियों की चिंता सामने आई है। उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों तक पुराने परीक्षा पैटर्न के हिसाब से तैयारी की। अब अचानक परीक्षा के स्वरूप में बदलाव से उनकी तैयारी प्रभावित हो सकती है। हालांकि परीक्षा के प्रश्नों की संख्या, अंक और नेगेटिव मार्किंग जैसी शर्तों के लिए संबंधित भर्ती का आधिकारिक विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका ही अंतिम आधार है।
अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
जब नियम बदल चुके हैं, तो अभ्यर्थी सरकार से क्या चाहते हैं? दरअसल, उनकी मांग है कि आने वाली TGT-PGT भर्ती में कम से कम एक अवसर पुरानी नियमावली के आधार पर दिया जाए। उनका तर्क है कि उन्होंने अपनी शैक्षिक योग्यता पुरानी नियमावली को ध्यान में रखकर हासिल की थी। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जो वर्षों से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। कुछ की उम्र भी अब अधिक हो चुकी है। ऐसे में नई नियमावली लागू होने से उनके सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उम्र निकलने का डर और दूसरी तरफ नई योग्यता की शर्तों के कारण भर्ती से बाहर होने की आशंका।
अभ्यर्थियों का दावा है कि नई अर्हताओं से सात से आठ लाख तक अभ्यर्थी प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि यह प्रदर्शनकारियों का दावा है, आयोग की ओर से प्रमाणित प्रभावित अभ्यर्थियों का आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। उनका कहना है कि सरकार चाहे तो इस भर्ती में पुरानी नियमावली के अनुसार एक आखिरी अवसर देकर उन्हें राहत दे सकती है। अब नई भर्ती भी आ चुकी है, इसलिए ये विवाद इस पूरे मामले को और बढ़ावा दे रहा है।
भर्ती के लिए 24 अक्टूबर से आवेदन शुरू
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 23 अक्टूबर 2026 को TGT भर्ती के लिए विज्ञापन संख्या 07/2026 जारी किया है। इसके तहत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 17,735 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रस्तावित है। 24 अक्टूबर से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
ऐसे में अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ गई है कि अगर भर्ती नई अर्हताओं के आधार पर आगे बढ़ी तो पुरानी योग्यता के आधार पर तैयारी करने वाले युवाओं को मौका नहीं मिल पाएगा। यही वजह है कि अभ्यर्थी अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि सरकार से ठोस निर्णय चाहते हैं।
सपा ने अभ्यर्थियों का किया समर्थन
वहीं, अभ्यर्थियों के आंदोलन में अब राजनीतिक दलों की एंट्री भी हो चुकी है, जिससे ये सियासी विवाद बन चुका है। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों के साथ अभ्यर्थियों से मिलने पहुंच गए और उनके प्रदर्शन को समर्थन भी दिया।
सपा नेताओं ने अभ्यर्थियों की टीजीटी-पीजीटी भर्ती के पुराने नियमों की मांगों का समर्थन किया और सरकार पर युवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। वहीं, अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य और रोजगार के अधिकार के लिए है।
यूपी सरकार के सामने भर्ती को पूरा करने की चुनौती
तो ऐसे में अब सरकार के सामने कई चुनौती आएंगी। क्योंकि एक तरफ सरकार और आयोग के सामने भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ उन अभ्यर्थियों की चिंता भी है, जिन्होंने वर्षों तक पुरानी नियमावली के आधार पर तैयारी की।
अब देखना ये होगा कि सरकार अभ्यर्थियों की मांग पर क्या फैसला लेती है? क्या युवाओं को पुरानी नियमावली के तहत एक आखिरी मौका मिलेगा या नए नियमों के आधार पर ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। क्योंकि TGT-PGT भर्ती का ये विवाद सिर्फ नियमों में बदलाव का मामला नहीं रह गया है। बल्कि ये उन हजारों-लाखों युवाओं की उम्मीदों से भी जुड़ गया है, जिन्होंने शिक्षक बनने का सपना लेकर मास्टर डिग्री ली और नौकरी की तैयारी की।

