UP Shankaracharya Controversy : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन स्नान को लेकर चल रही विवाद की वजह से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच तकरार जारी है। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरियाणा के सोनीपत में बिना किसी का नाम लिए संतो को चेतावनी दें डाली।
बिना नाम लिए सीएम योगी ने दिया शंकराचार्य को जवाब
गुरुवार को हरियाणा के सोनीपत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहें विवाद के बीच में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म और संतो पर ज्ञान दे दिया। सीएम योगी ने कहा कि कुछ कालनेमि हैं जो धर्म के नाम पर सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। हमें उनसे सावधान रहना चाहिए।
कालनेमि सनातन धर्म को बदनाम कर रहे- योगी
सीएम योगी ने कहा, “किसी को परंपरा अधिक करने का अधिकार नहीं है। संन्यासी की कोई भी संपत्ति नहीं होती। धर्म ही एक संत की सबसे बड़ी पहचान है। धर्म ही संत कि सबसे बड़ी पहचान और राष्ट्र का स्वाभिमान होता है। बहुत से कालनेमि सनातन धर्म को बदनाम कर रहे हैं और धर्म के नाम पर सनातन को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं।”
गलती कर कौन रहा?- अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह सही कह रहे हैं, लेकिन उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा कि ये गलती कर रहा कौन है। उनका आरोप है कि उनके अधिकारी और प्राधिकरण के लोग सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं और उसकी ताकत को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह प्रशासन के इस रवैये से नाराज हैं और धरने पर बैठ गए हैं।
नोटिस- नोटिस का खेल
वहीं,माघ मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस भी भेजा है कि वे अपने नाम के आगे कैसे शंकराचार्य लिख रहे हैं, जबकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी प्रशासन को नोटिस भेजा है। इसके साथ ही प्रशासन ने मेले में आश्रम की जमीन न देने की चेतावनी दी है।
माघ मेला प्रशासन ने जारी की 2 नोटिस
बता दें कि माघ मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दो बार नोटिस जारी की है। पहली नोटिस में पूछा था कि वो शंकराचार्य कैसे बने? जबकि दूसरे नोटिस में प्रशासन में अविमुक्तेश्वरानंद से कहा कि अगर 24 घंटे में नोटिस का जवाब नहीं दिया तो माघ मेला में उनका आना प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह स्थिति एक बड़े युद्ध को बुलावा देने जैसी है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारा खून नहीं खौलता, तब तक यह सब चलता रहेगा।
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