UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या उनकी बहू राजलक्ष्मी यादव को जसवंतनगर विधानसभा सीट से सपा का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। इस पर शिवपाल यादव ने हंसते हुए कहा, “कहां से चंडू खाने की खबर निकालकर लाते हो…” उनके इस जवाब को राजलक्ष्मी के चुनाव लड़ने की खबरों को अफवाह बताने के तौर पर देखा जा रहा है।
शिवपाल यादव के बयान पर सियासी चर्चा
जसवंतनगर सीट को शिवपाल यादव का मजबूत गढ़ माना जाता है। वे यहां से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं। उनके बयान के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि 2027 के चुनाव में सैफई परिवार की नई पीढ़ी को मौका मिलेगा या पार्टी अनुभवी नेताओं पर ही भरोसा करेगी।
जसवंतनगर सीट और राजलक्ष्मी के नाम की चर्चा क्यों?
जसवंतनगर सीट समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव के परिवार से लंबे समय से जुड़ी रही है। मुलायम सिंह यादव के बाद शिवपाल यादव इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव बदायूं से सांसद चुने गए। इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा होने लगी कि भविष्य में आदित्य या उनकी पत्नी राजलक्ष्मी यादव को विधानसभा चुनाव में उतारा जा सकता है।
शिवपाल यादव ने क्या कहा?
राजलक्ष्मी यादव लोकसभा चुनाव के दौरान अपने पति आदित्य यादव के प्रचार में सक्रिय रही थीं। हालांकि, शिवपाल यादव ने उन्हें जसवंतनगर से उम्मीदवार बनाए जाने की खबर पर तंज कसते हुए इसे अफवाह बताया।
क्या 2024 की रणनीति 2027 में भी अपनाएगी सपा?
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने परिवार के कई सदस्यों को टिकट दिया था। डिंपल यादव मैनपुरी से, धर्मेंद्र यादव आजमगढ़ से, अक्षय यादव फिरोजाबाद से और आदित्य यादव बदायूं से चुनाव लड़े थे। इनमें पार्टी को कई सीटों पर सफलता मिली।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी परिवार की नई पीढ़ी और नए चेहरों को मौका देगी। फिलहाल इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
क्या नए चेहरे चुनाव लड़ सकते हैं?
शिवपाल यादव ने राजलक्ष्मी के चुनाव लड़ने की खबरों को खारिज किया है। फिर भी, बदायूं में चुनाव प्रचार के दौरान उनकी सक्रियता को देखते हुए राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। सैफई परिवार से जुड़े युवा सदस्य भी विधानसभा टिकट की दावेदारी कर सकते हैं। हालांकि, उम्मीदवारों का फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
PDA और परिवारवाद का सवाल
अखिलेश यादव पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को साथ लाने वाले ‘PDA’ फॉर्मूले पर जोर दे रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दल सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में पार्टी के लिए उम्मीदवार चुनते समय परिवार और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाना अहम होगा।
शिवपाल यादव के बयान से फिलहाल इतना साफ है कि जसवंतनगर सीट पर उनकी पकड़ बनी हुई है। 2027 में यहां से कौन चुनाव लड़ेगा, इसका फैसला अखिलेश यादव और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा।

