UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कहे जाने के बाद सपा की प्रतिक्रिया सामने आई। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संकेत दिया है कि सीटों का फैसला केवल संख्या देखकर नहीं, बल्कि उम्मीदवार की जीत की संभावना के आधार पर होना चाहिए।
सीटों से ज्यादा अहम जीतने वाला उम्मीदवार
अखिलेश यादव का कहना है कि गठबंधन में उसी सीट पर दावा किया जाना चाहिए, जहां पार्टी का मजबूत जनाधार हो और उसका उम्मीदवार जीत सकता हो। उनका मानना है कि केवल दबाव बनाकर या बड़ी संख्या में सीटें मांगकर गठबंधन को फायदा नहीं होगा। हर सीट पर भाजपा को हराने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सपा की ओर से 403 में से 350 सीटों पर तैयारी तेज करने की बात भी कही गई है। राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर हुई पार्टी की बैठक में अखिलेश यादव ने इस दिशा में काम करने का संकेत दिया। हालांकि, सपा ने यह नहीं बताया कि गठबंधन के सहयोगियों को कितनी सीटें दी जा सकती हैं।
कांग्रेस ने 150 से कम सीटें लेने से किया इनकार
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एक मीडिया बातचीत में कहा था कि सपा और कांग्रेस का गठबंधन अक्टूबर में तय हो सकता है। उनके मुताबिक, कांग्रेस 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और गठबंधन में 150 से कम सीटें स्वीकार नहीं करेगी।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी कहा था कि भाजपा के खिलाफ कांग्रेस देश की मुख्य विपक्षी पार्टी है और सीटों के बंटवारे में पार्टी अपनी राजनीतिक हैसियत से समझौता नहीं करेगी। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि सीटों पर बातचीत पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। फिलहाल प्रदेश संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
सीटों पर दावा करने से पहले नाम बताने की बात
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सपा ने कांग्रेस के सामने सीटों को लेकर कुछ शर्तें रखी हैं। सपा चाहती है कि कांग्रेस जिन सीटों पर दावा कर रही है, वहां के संभावित उम्मीदवारों के नाम पहले बताए। इसके बाद उन सीटों पर पार्टी के संगठन और उम्मीदवार की स्थिति की जांच की जाए।
सीटों के लिए सपा ने कांग्रेस को दी ये शर्ते
कांग्रेस अपनी पसंद की सीटों की साफ सूची दे।
हर सीट के लिए संभावित उम्मीदवार का नाम बताए।
उस इलाके में पार्टी के संगठन और कार्यकर्ताओं की स्थिति देखी जाए।
उम्मीदवार में स्थानीय समीकरण समझने और चुनाव जीतने की क्षमता हो।
दोनों दल बातचीत से पहले अपना पक्ष मजबूत कर रहे
कांग्रेस का कहना है कि उसके नेताओं ने सीटों को लेकर करीब दो महीने तक चर्चा की है और पार्टी 150 सीटों पर दावा करेगी। दूसरी ओर, सपा ने 350 सीटों पर तैयारी की बात कही है, लेकिन सहयोगियों के लिए सीटों की संख्या नहीं बताई है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अक्टूबर में होने वाली बातचीत से पहले दोनों दल अपना-अपना पक्ष मजबूत कर रहे हैं। सपा का संदेश है कि सीटों का बंटवारा केवल मांग के आधार पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार और इलाके में पार्टी की ताकत देखकर होगा।
2024 के चुनाव से मिली सीख
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के गठबंधन को अच्छी सफलता मिली थी। जानकारों का मानना है कि मजबूत उम्मीदवारों और सही सामाजिक समीकरणों ने इस जीत में अहम भूमिका निभाई। सपा अब इसी तरह की रणनीति विधानसभा चुनाव में भी अपनाना चाहती है।
फिलहाल दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर अंतर साफ है। कांग्रेस ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि सपा हर सीट पर जीत की संभावना को अहम बता रही है। इस मुद्दे पर अंतिम फैसला आने वाली बैठकों में हो सकता है।
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