UP BJP Secret Meeting : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से उबाल आ गया है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गृह मंत्री अमित शाह की 50 मिनट की सीक्रेट मीटिंग ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। यह बैठक न केवल 2027 के विधानसभा चुनाव बल्कि आगामी साल 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या इस मीटिंग में योगी आदित्यनाथ को लेकर कोई बड़ा फैसला हो गया है?
अमित शाह ने की 50 मिनट तक सीक्रेट मीटिंग
मंगलवार को लखनऊ में गृह मंत्री अमित शाह ने एक गुप्त बैठक की। यह बैठक 50 मिनट तक चली। इस बैठक में अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल रहें। मग़र, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इस बैठक में नहीं पहुंचे। राजनीतिज्ञ इस बैठक को एक सामान्य समीक्षा बैठक नहीं मान रहें बल्कि यह बैठक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक मजबूत रणनीति है।
लखनऊ के भाजपा कार्यालय में हुई बैठक
लखनऊ में भाजपा के शीर्ष नेता अमित शाह ने यह सीक्रेट बैठक मुख्यमंत्री आवास या राजभवन नहीं की बल्कि भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित की। अमित शाह का भाजपा कार्यालय में बैठक करना एक बड़ी सियासी रणनीति की ओर संकेत देता है। जानकारी के मुताबिक, बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के संगठन मंत्री (RSS और पार्टी के बीच महत्वपूर्ण कड़ी) डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे।
‘ऊपर मोदी, नीचे योगी’ – अमित शाह का स्पष्ट संदेश
इस बैठक में अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “ऊपर मोदी हैं, नीचे योगी। बीच में कोई नहीं।” इस बयान ने यूपी की सियासत में चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया। पिछले कुछ महीनों से यह चर्चा थी कि भाजपा 2027 से पहले नेतृत्व परिवर्तन कर सकती है, लेकिन अमित शाह के इस बयान ने स्पष्ट कर दिया कि यूपी विधानसभा चुनाव-2027 में योगी आदित्यनाथ ही पार्टी का चेहरा रहेंगे।
2024 से 2027 तक का रोडमैप
इस बैठक में अमित शाह ने सीएम योगी के साथ मिलकर 2027 के विधानसभा चुनाव का रोड मैप तैयार कर लिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी की सीटों में गिरावट के बाद भाजपा ने फैसला किया है कि”दिल्ली का रास्ता लखनऊ से ही तय होगा।” अमित शाह ने कहा कि 2027 में कोई ढील नहीं दी जाएगी। संगठन, सरकार और RSS तीनों को एकसाथ मिलकर तीव्रता से काम करने का निर्देश दिया गया है।
केशव मौर्य की अनुपस्थिति सियासी खेल या भ्रम?
हालांकि, इस चर्चा में सबसे अधिक चर्चा इस बात की रही कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इस बैठक में मौजूद नहीं थे। हाल ही के दिनों में डिप्टी सीएम केशव मौर्य और शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवादों को योगी बनाम भाजपा के नैरेटिव से जोड़ने का प्रयास किया गया। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ राजनीतिक भ्रम है। RSS पहले ही संकेत दे चुका है कि सीएम योगी का विरोध पार्टी के खिलाफ विद्रोह माना जाएगा। शायद यही वजह है कि इस बैठक में केशव प्रसाद मौर्य शामिल नहीं हुए।
यूपी में अमित शाह ने का ‘स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल सिग्नल’
अमित शाह की ते बैठक भले ही ‘गुप्त’ कही जा रही हो, लेकिन इसका संदेश साफ है कि 2027 में उत्तर प्रदेश का नेतृत्व योगी आदित्यनाथ ही करेंगे। भाजपा और RSS पूरी तरह एकजुट हैं और अब ‘योगी हटाओ’ का नैरेटिव खत्म हो चुका है। यूपी चुनाव को लेकर भाजपा अब मिशन मोड में एंट्री कर चुकी है।
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