Who is Pankaj Chaudhary, Uttar Pradesh BJP president: भारतीय जनता पार्टी (BJP Uttar Pradesh) ने उत्तर प्रदेश इकाई के नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को चुना है। (Pankaj Chaudhary UP BJP Chief) नामांकन 13 दिसंबर को दाखिल हुआ, जबकि औपचारिक ऐलान 14 दिसंबर को लखनऊ में मेगा इवेंट में होगा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और विनोद तावड़े की मौजूदगी में ये प्रक्रिया पूरी हुई। पंकज चौधरी अमित शाह और पीएम मोदी के करीबी माने जाते हैं। (Pankaj Chaudhary Amit Shah Relation) आइए जानते हैं पंकज चौधरी की जीवनी, राजनीतिक सफर और पंकज चौधरी के अध्यक्ष चुने जाने के पीछे के राजनीतिक कारण।
शनिवार को चौधरी ने अपना नामांकन दाखिल किया है, उनके पास किसी दूसरे नेता ने अपना नामांकन नहीं दिया इसका मतलब साफ़ है कि वे ही पार्टी की पसंद हैं और निर्विरोध चुने गए हैं. पंकज चौधरी के उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने का आधिकारिक एलान रविवार को लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल करेंगे
पंकज चौधरी की जीवनी: गोरखपुर से दिल्ली तक का सफर
पंकज चौधरी की उम्र करीब 61 साल है। वे गोरखपुर (Gorakhpur) में पैदा हुए और कुर्मी समुदाय (Kurmi Community Leader) से ताल्लुक रखते हैं। (OBC Kurmi Face UP BJP) राजनीतिक परिवार से आते हैं – उनकी मां उज्ज्वल चौधरी महाराजगंज जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। (Pankaj Chaudhary Political Family Background) वे राहत रूह तेल कंपनी के मालिक भी हैं और अच्छे प्लानर के रूप में जाने जाते हैं।
पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर: पार्षद से केंद्रीय मंत्री तक
पंकज चौधरी का राजनीतिक करियर स्थानीय स्तर से शुरू हुआ।
- गोरखपुर नगर निगम में पार्षद चुने गए।
- गोरखपुर के डिप्टी मेयर भी रहे।
- 1990 में बीजेपी जॉइन की।
- 1991 में पहली बार महाराजगंज से सांसद बने।
- अब तक महाराजगंज लोकसभा सीट से 7 बार सांसद चुने गए (7-Time MP Maharajganj)।
- मोदी सरकार में दो बार केंद्रीय मंत्री बने – वर्तमान में वित्त राज्य मंत्री (MoS Finance Pankaj Chaudhary)।
- 2023 में पीएम मोदी अचानक उनके घर पहुंचे, जो उनकी करीबी का प्रतीक था। (PM Modi Gorakhpur Visit)
गोरखपुर क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ और पंकज चौधरी बीजेपी के दो प्रमुख क्षत्रप हैं, लेकिन दोनों की राजनीतिक शैली अलग है। (Yogi Adityanath vs Pankaj Chaudhary)
पंकज चौधरी के यूपी बीजेपी अध्यक्ष चुने जाने का राजनीतिक कारण:
कुर्मी वोट बैंक को साधने का दांवबीजेपी ने पंकज चौधरी को अध्यक्ष बनाकर ओबीसी खासकर कुर्मी समुदाय को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। (2027 UP Assembly Elections Strategy)
- कुर्मी समाज यादवों के बाद सबसे बड़ा ओबीसी समुदाय है, राज्य में 8-10% आबादी।
- 30-40 विधानसभा सीटों पर असर डालता है (पूर्वांचल, अवध, रोहिलखंड आदि)।
- 2024 लोकसभा चुनाव में कुर्मी वोटों का एक हिस्सा PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नाम पर सपा की ओर खिसक गया।
- भाजपा के 11 कुर्मी सांसदों में से सिर्फ 3 जीते, जबकि सपा के 7।
- पंचायत चुनाव और 2027 विधानसभा को देखते हुए कुर्मी वोटों को एकजुट रखना जरूरी।
- चौधरी चौथे कुर्मी भाजपा अध्यक्ष होंगे (पहले विनय कटियार, स्वतंत्र देव सिंह, ओम प्रकाश सिंह)। (Kurmi BJP Presidents History)
संतोष गंगवार के गवर्नर बनने के बाद चौधरी पार्टी के प्रमुख कुर्मी चेहरा बनकर उभरे। (Post Santosh Gangwar Era) ये नियुक्ति संगठन को मजबूत करने और सरकार-संगठन के बीच बैलेंस बनाने की दिशा में है।
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