Simhastha 2028: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 (Simhastha 2028) केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति (Sanatan Culture), सामाजिक समरसता और प्रशासनिक क्षमता का वैश्विक मंच है। उन्होंने बताया कि सरकार स्थायी विकास (Sustainable Development) पर विशेष जोर दे रही है, ताकि सिंहस्थ के बाद भी उज्जैन और पूरे प्रदेश को इसका लाभ मिल सके। इसके लिए बुनियादी ढांचा (Infrastructure), जल प्रबंधन (Water Management), स्वच्छता (Sanitation), यातायात (Traffic Management), घाट विकास (Ghat Development), श्रद्धालु सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ शिप्रा नदी (Shipra River) की स्वच्छता, स्थायी सीवर नेटवर्क (Sewer Network), डिजिटल ट्रैफिक मैनेजमेंट (Digital Traffic Management), भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) और आपदा प्रबंधन (Disaster Management) को प्राथमिकता दी जाएगी।
Simhastha 2028: उज्जैन में सिंहस्थ-2028 (Simhastha 2028) को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी कड़ी में आयोजित कार्यशाला “सिंहस्थ-2016 के अनुभव और 2028 का संकल्प” (Workshop) में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति (Sanatan Culture), सामाजिक समरसता और प्रशासनिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का सबसे बड़ा अवसर है।
स्थायी विकास पर रहेगा सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन से जुड़ना सौभाग्य की बात है, लेकिन इसके साथ बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है। उन्होंने कहा कि अब केवल अस्थायी व्यवस्थाओं पर नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी विकास कार्यों (Sustainable Development) पर ध्यान दिया जाएगा, जिनका लाभ सिंहस्थ के बाद भी शहर और प्रदेश को लंबे समय तक मिलता रहे।
उन्होंने संकेत दिए कि वर्ष 2025 के बाद सिंहस्थ से जुड़े बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास में तेजी लाई जाएगी। इसके तहत जल प्रबंधन (Water Management), स्वच्छता (Sanitation), यातायात (Traffic Management), घाट विकास (Ghat Development), सीवर नेटवर्क (Sewer Network) और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
उज्जैन के समग्र विकास से जुड़ी हैं तैयारियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के कारण स्वयं श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। ऐसे में यहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को केवल मेले तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे उज्जैन के समग्र विकास (Urban Development) से जोड़ा जा रहा है।
2004 और 2016 के अनुभवों से मिलेगी नई दिशा
कार्यशाला में सिंहस्थ-2004 और सिंहस्थ-2016 के आयोजन से जुड़े अनुभव भी साझा किए गए। तत्कालीन कलेक्टर कवीन्द्र कियावत ने बताया कि सीमित संसाधनों और भारी भीड़ के बावजूद बेहतर समन्वय (Coordination) और नवाचार (Innovation) के जरिए सफल आयोजन संभव हुआ था। वहीं, वर्तमान एडीजे (ADG) राकेश गुप्ता ने कहा कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता प्रशासन, संत समाज और आम जनता के बीच मजबूत सहभागिता (Public Participation) और संवाद पर निर्भर करती है।
पर्यावरण और भीड़ प्रबंधन पर रहेगा विशेष जोर
संभागायुक्त आशीष सिंह ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस बार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि शिप्रा नदी (Shipra River) की स्वच्छता, स्थायी सीवर व्यवस्था, बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, डिजिटल ट्रैफिक मैनेजमेंट (Digital Traffic Management), पार्किंग, नए घाटों का निर्माण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसके साथ ही भीड़ प्रबंधन (Crowd Management), आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation) को भी तैयारियों का अहम हिस्सा बनाया गया है।
विश्वस्तरीय आयोजन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वर्ष 2004 और 2016 के अनुभवों से सीख लेते हुए ऐसा सिंहस्थ आयोजित किया जाएगा, जो भारतीय संस्कृति, आधुनिक प्रबंधन और सामाजिक सहभागिता का विश्वस्तरीय उदाहरण (Global Benchmark) बने। उन्होंने सभी संबंधित विभागों और समाज से इस दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया।

