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उज्जैन में मुहर्रम जुलुस के दौरान वैन ब्लास्ट! लिखा-ले फिर आ गए…

Ujjain Muharram Van Blast Video: महाकाल की नगरी और मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री के गृहग्राम उज्जैन में मोहर्रम (Ujjain Muharram Julus) के जुलूस के दौरान ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने न सिर्फ उज्जैन पुलिस (Ujjain Police) और प्रशासन के प्रति आम लोगों का भरोसा ही तोड़ दिया बल्कि सभ्य समाज में रहने वालों के लिए डर का सबब बन गया. घटना 23 जून की रात की है जो अब सुर्ख़ियों में आई है. उज्जैन के बड़नगर (Badnagar Ujjain Muharram Blast) के अडान मोहल्ले में जुलुस के दौरान देश में दहशत फैलाने का पैगाम जारी किया गया. जुलुस में एक वैन को क्रेन के जरिये 40 फ़ीट ऊपर लटकाया गया और उसे विस्फोटक से उड़ा दिया गया। और वैन के ब्लास्ट होते ही नीचे जमा लोग मजहबी नारेबाजी करने लगे.

हां मुहर्रम के जुलुस के दौरान तरह-तरह की गतिविधियां देखने को मिलती हैं मगर चौराहे में वैन को आसमान में लटकरार उसे विस्फोटक से ब्लास्ट करना कब से मुहर्रम की परंपरा बन गई? इतना ही नहीं। मामला सिर्फ वेन को ब्लास्ट करने तक सीमित नहीं है. वैन में पोस्टर चिपकाया गया था जिसमे लिखा था ‘ले फिर आ गए’ नीचे खड़े लोग भी यही पोस्टर लेकर चिल्लाचोट मचा रहे थे. सवाल ये है कि ‘ले फिर आ गए’ का मतलब क्या है? ऐसा कौन आ गया है? जिसने आने के जश्न में कानून की धज्जिया उड़ाते हुए, बीच चौराहे में ऐसी असामाजिक, असभ्य, और अराजक हरकत की गई है. इसका पता सरकार को लगाना चाहिए।

हैरानी की बात ये है कि वैन को ब्लास्ट करने के बाद, उसे नीचे उतारा गया और फिर उसपर दो लोग लाल परचम लेकर चढ़ गए और फिर से वैन को ऊंचाई पर ले जाया गया।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, लोग यह देखकर नाराज हैं कि आखिर उज्जैन जैसी नगरी में खुल्लम खुल्ला ऐसी दहशर्तगर्दी कैसे की जा सकती है?

इस मामले को लेकर स्वामी शिवानंद गिरी ने सीएम यादव को निशाने में लेते हुए कहा- महाकाल की नगरी में उज्जैन में मुहर्रम के दौरान..यही संदेश दिया जा रहा है कि हम हम काफिरों की गाड़ियों को इसी तरह उड़ा देंगे” उन्होंने आगे कहा- जहां पटाखे, दही हांडी पर बैन लग जाता है वहां गाडी को विस्फोटक से उडाकर, आतंकी गतिविधि जैसी घटना दिखाकर त्योहार मनाने की इजाजत कैसे मिल जाती है… मध्य प्रदेश को एक मजबूत मुख्य मंत्री की जरूरत हैँ.

X में लोग इस घटना पर हैरानी जता रहे हैं कि आखिर ऐसा जुलुस निकालने की परमिशन कैसे मिल गई? लोग पूछ रहे हैं कि त्यौहार के नाम पर ऐसी आतंकी गतिविधि जैसी घटना दिखाने की इजाजत कैसे मिल जाती है?

देखा जाए तो यहां उज्जैन पुलिस और प्रशासन भी इस घटना का जिम्मेदार है. अगर वैन ब्लास्ट करने की परमिशन दी गई है तो किस आधार पर दी गई? और अगर नहीं दी गई है तो बिना अनुमति के इस तरह का प्रदर्शन कैसे हो सकता है?

जब इस मामले में तूल पकड़ा तब उज्जैन पुलिस हरकत में आई। अडिशनल एसपी करणदीप सिंह ने बताया कि-ऐसी किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी गई थी। मामले में FIR दर्ज की गई है और 4 आरोपियों को नामजद किया गया है.

बहरहाल अबतक इन आरोपियों की गिरफ़्तारी नहीं हुई है. लेकिन यह घटना कई सवाल खड़े कर देती है कि आखिर जब ये सब किया जा रहा था तब पुलिस कहां थी? आखिर सार्वजनिक स्थान पर कानून को चुनौती देने वाला यह प्रदर्शन हुआ कैसे? अगर इसकी अनुमति नहीं थी, तो इसे रोका क्यों नहीं गया? और अगर प्रशासन की आंखों के सामने यह सब हुआ, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? शब्द साँची इस मामले से जुड़े अहम अपडेट्स आपतक पहुंचाने का काम करता रहेगा, आपको अपडेट मिलते रहें इसके लिए चैनल को सब्स्क्राइब जरूर करें।

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