UGC A Fellowship For Disabled Students : दिव्यांग छात्रों के लिए यूजीसी की योजनाएं, सुविधाएं और अधिकार-समावेशी उच्च शिक्षा यूजीसी की पहल दिव्यांग छात्रों को भी मुख्यधारा से जोड़ रही है-उच्च शिक्षा में समानता और समावेशन के लिए प्रतिबद्ध विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दिव्यांगजनों के लिए एक सशक्त और सुगम शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने हेतु कई योजनाएं और नीतियां शुरू की हैं। ये प्रयास न केवल शारीरिक बुनियादी ढांचे को सुलभ बना रहे हैं, बल्कि शैक्षिक, वित्तीय और सामाजिक बाधाओं को भी दूर कर रहे हैं। यूजीसी (UGC) की HEPSN योजना, फेलोशिप, लेखक सुविधा और समावेशी नीतियों के बारे में जानें, जो उच्च शिक्षा में दिव्यांगजनों के लिए सुगम्य और समान अवसर सुनिश्चित करती हैं।
यूजीसी की प्रमुख योजनाएं और प्रावधान
HEPSN-बुनियादी ढांचे का सशक्तिकरण-उच्च शिक्षा में विकलांगों के लिए विशेष योजना (HEPSN) के तहत, कॉलेजों को ₹5,00,000 तक का अनुदान प्रदान किया जाता है।
इस राशि का उपयोग- जिसमें कैंपस में रैंप, लिफ्ट और अन्य सुगम्य संरचनाएं बनाने,दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष इकाइयां स्थापित करने,तकनीकी सहायता और उपकरण उपलब्ध कराने में किया जाता है।
वित्तीय सहायता-शोध के लिए विशेष फेलोशिप-यूजीसी एम.फिल और पीएच.डी. कर रहे दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष फेलोशिप का प्रावधान करता है। इससे उन्हें आर्थिक चुनौतियों के बिना अपना शोध जारी रखने में सहायता मिलती है, जो उनके शैक्षिक और पेशेवर विकास को गति देता है।
शैक्षिक लचीलापन और सहायता
- दिव्यांग छात्र एक समय में एक से अधिक वैकल्पिक पाठ्यक्रमों के क्रेडिट ले सकते हैं।
- विशेष शिक्षण सामग्री, ऑडियो-विजुअल एड्स और अनुकूलित पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं।
- शिक्षण पद्धतियों को व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जाता है।
परीक्षा में विशेष सुविधाएं
- दृष्टिबाधित और अन्य पात्र छात्रों के लिए लेखक (scribe) की सुविधा।
- अतिरिक्त समय का प्रावधान, जो परीक्षा की चिंता को कम करने और उचित प्रदर्शन में सहायक होता है।
- वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धतियों का विकल्प, जहाँ आवश्यक हो।
समान अवसर और शिकायत निवारण
यूजीसी के नए नियम (2026) के अनुसार-कैंपस में दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव को गंभीर अपराध माना गया है। प्रत्येक संस्थान में समान अवसर सेल या इक्विटी समिति का गठन किया जाएगा और शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निवारण की व्यवस्था की गई है।
विशेष मार्गदर्शन और समर्थन
सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों के लिए केंद्र या मार्गदर्शन ब्यूरो स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। ये केंद्र छात्रों को शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक और तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।
एक समावेशी भविष्य की ओर
यूजीसी की ये पहल केवल नीतिगत दस्तावेजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उच्च शिक्षा के परिदृश्य में मूर्त बदलाव ला रही हैं। दिव्यांग छात्र अब न केवल कक्षाओं तक पहुंच बना पा रहे हैं, बल्कि शोध,नवाचार और नेतृत्व की भूमिकाओं में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
निष्कर्ष-यूजीसी की समावेशी शिक्षा नीतियां एक ऐसे समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं जहां योग्यता के अलावा किसी भी आधार पर भेदभाव न हो। ये प्रयास शिक्षा को सच्चे अर्थों में सर्वसुलभ बनाकर राष्ट्र निर्माण में हर व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। शैक्षिक संस्थानों, शिक्षकों और छात्रों के सहयोग से यह सपना और तेजी से साकार होता दिख रहा है। यह लेख यूजीसी की विभिन्न अधिसूचनाओं और नीतिगत दस्तावेजों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट देखें या अपने संस्थान के समान अवसर सेल से संपर्क करें।

