भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन समान नागरिक संहिता यानि की यूसीसी विधेयक 2026 सदन में पेश कर दिया गया है, जिस पर कल चर्चा होगी। इसी दौरान भोपाल में विधानसभा का घेराव करने निकले ओबीसी महासभा के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
विधेयक पेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने मानसून सत्र के पहले ही दिन मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 विधानसभा में प्रस्तुत कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने जानकारी दी कि इस विधेयक पर कल (मंगलवार को) सदन में चर्चा कराई जाएगी।
विपक्ष का भारी हंगामा
कांग्रेस विधायकों ने उज्जैन जमीन खरीदी मामले को लेकर सदन में भारी नारेबाजी और हंगामा किया, जिसके कारण विधानसभा की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा। कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा पहुंचे थे। भोपाल से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने यूसीसी के विरोध में तख्तियां भी दिखाईं।
सड़कों पर ओबीसी महासभा का प्रदर्शन और झड़प
ओबीसी महासभा मध्य प्रदेश के सदस्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पूरी तरह लागू करने और 13 प्रतिशत पदों को होल्ड से मुक्त (होल्ड फ्री) करने की मांग को लेकर विधानसभा का घेराव करने निकले थे। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रंगमहल चौराहे पर ही रोक लिया। जैसे ही कार्यकर्ताओं ने वहां लगाए गए बैरिकेड्स पर चढ़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार) चला दी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें वहां से हटा दिया।
मध्य प्रदेश यूसीसी ड्राफ्ट की मुख्य बातें
इस विधेयक को कैबिनेट ने रविवार को ही मंजूरी दी थी। यह कानून राज्य की अनुसूचित जनजातियों जैसे कि भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया समुदायों पर लागू नहीं होगा।
शादी का नियम- प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए एक विवाह (मोनोगेमी) का नियम अनिवार्य होगा। पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है।
तलाक और उत्तराधिकार- मौखिक, एकतरफा या अनौपचारिक तरीकों से दिए जाने वाले तलाक (जैसे तीन तलाक या गैर-कानूनी तरीके) प्रतिबंधित होंगे और इन्हें दंडनीय अपराध माना जाएगा।
लिव-इन रिलेशनशिप- लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए 1 महीने के भीतर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होगा। इसके अलावा, लिव-इन या सरोगेसी से पैदा होने वाले बच्चों को भी संपत्ति और नागरिकता के समान कानूनी अधिकार मिलेंगे।

