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एमपी विधानसभा में यूसीसी बिल पास, यह कानून लागू करने वाला बना चौथा राज्य, शादी से लेकर लिव-इन तक बदलेगे नियम

भोपाल। मध्यप्रदेश के इतिहास में 21 जुलाई की तरीख खास तौर से दर्ज हो गई है, विपक्ष के भारी हंगामें के बाद विधानसभा में समान नागरिक संहिता यानि यूसीसी कानून विधेयक बहुमत से पारित हो गया है। विधानसभा में इस विधेयक को लेकर मंगलवार को चर्चा की गई। इस दौरान न सिर्फ हंगामें की स्थित बनी बल्कि विपक्ष की नारेबाजी और तीखी नोकझोक के बीच यूसीसी बिल को विधानसभा में पास कर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में विधेयक पर अपना वक्तव्य रखा। यूसीसी बिल पारित होने के साथ ही मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने वाला देश का प्रमुख राज्य बन गया है। 

93 प्रतिशत नागरिकों ने यूसीसी का समर्थन किया

यूसीसी बिल पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के 93 प्रतिशत नागरिकों ने यूसीसी का समर्थन किया है। उन्होने इस बिल को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि जो पुरुषों का अधिकार है वहीं महिलाओं का अधिकार रहेगा। सभी प्रकार के अधिकार समान होंगे। लिविंग रिलेशनशिप की व्यवस्था में जो दुरुपयोग करेगा उसे 5 साल की सजा होगी। उन्होने बताया कि एक महीने से कम समय में सरकार ने पूरा अमल किया।

राम और रहीम में अब अंतर नही रहेगा

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेसियों से सवाल किए कि हिंदू मुसलमान में क्यों अंतर करती है, राम रहीम को एक चश्मे से क्यों नहीं देखती, क्यों भेदभाव करती है, हम सब भारत मां के लाल भेदभाव का कहां सवाल। वे कांग्रेस पर हमला बोले और कहा कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण का काम वर्षों तक किया है। देश का बंटवारा भी कांग्रेस की गलत मानसिकता से हुआ। कांग्रेस ने विदेशी पद्धति के आधार पर शासन चलाने की पद्धति को अपनाया। हम सरिया कानून नहीं बल्कि एक समान कानून चाहते हैं। सबके जीवन में बेहतरीन का अवसर मिलना चाहिए। कई मुस्लिम बहनों और भाइयों ने इसका समर्थन किया अपने सुझाव दिए।
 

आदिवासियों के सवाल पर बोले सीएम

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आदिवासी भाई बहन के रीति रिवाज को हमने मुक्त रखा है. लेकिन कांग्रेस बताएं मुस्लिम बहनों के लिए यह कानून कैसा है. सिर्फ वोट बैंक के विषय में नहीं सोचना चाहिए और इसकी कीमत कांग्रेस चुका रही है। हमारी राष्ट्रवादी सरकार है।

बहुविवाह पर रोक और विवाह का सरकारी पंजीयन अनिवार्य

विवाह पंजीयन- प्रदेश की धरती पर होने वाले सभी विवाहों का शासकीय पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होगा। पंजीयन न कराने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
बहुविवाह पर प्रतिबंध- एक पत्नी के जीवित/रहते हुए दूसरे विवाह की अनुमति नहीं होगी। इसी तरह, एक पति के रहते हुए पत्नी को भी दूसरे विवाह की अनुमति नहीं दी जाएगी।
समानता व सशक्तिकरण- यह विधेयक महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा देने वाला है। हालांकि, नागरिकों के सामाजिक संस्कार पहले की तरह ही चलते रहेंगे।

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