वैश्विक बाजारों में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल है। Trump Tariff Threat यानी डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर नए आयात शुल्क लगाने की चेतावनी के बाद सोमवार को बिटकॉइन की कीमतों में 3% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ट्रंप के इस रुख ने न केवल क्रिप्टो मार्केट बल्कि अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स और एशियाई बाजारों को भी हिला कर रख दिया है।
यूरोप के 8 देशों पर ट्रंप का ‘टैरिफ प्रहार’
नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए यूरोप के आठ प्रमुख देशों—डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, फिनलैंड और ब्रिटेन पर 10% अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। ट्रंप ने इस टैरिफ को ग्रीनलैंड के स्वामित्व से जुड़ी अपनी मांग के साथ जोड़ा है। 1 फरवरी से लागू होने वाले इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है।
बिटकॉइन और क्रिप्टो बाजार में हड़कंप
जैसे ही ट्रंप की इस चेतावनी की खबर फैली, क्रिप्टो निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाना शुरू कर दिया। बिटकॉइन, जो हाल ही में $1,00,000 के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहा था, फिसलकर $92,000 के स्तर पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि छुट्टियों के कारण कम लिक्विडिटी ने इस गिरावट को और तेज कर दिया, जिससे भारी मात्रा में लॉन्ग पोजीशन लिक्विडेट हो गईं।
ग्लोबल स्टॉक मार्केट्स पर दबाव
अमेरिकी शेयर बाजार में छुट्टी होने के बावजूद फ्यूचर्स मार्केट में इसका गहरा असर दिखा। S&P 500 फ्यूचर्स में 0.7% और नैस्डैक फ्यूचर्स में 1% की गिरावट आई। एशिया में जापान का निक्केई इंडेक्स भी लगभग 1% टूट गया। निवेशक अब डरे हुए हैं कि अगर अमेरिका और यूरोप के बीच ट्रेड वॉर छिड़ता है, तो इसका असर वैश्विक जीडीपी ग्रोथ पर पड़ सकता है।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक बढ़ी
जहाँ एक तरफ रिस्की एसेट्स गिर रहे हैं, वहीं निवेशकों ने सोने (Gold) का रुख किया है। ट्रंप की इस Trump Tariff Threat के बाद सोने की कीमतों में 1.5% का उछाल आया और इसने नया रिकॉर्ड बनाया। चांदी की कीमतों में भी तेजी देखी गई। ट्रेड वॉर की आशंका में निवेशक ‘सेफ हेवन’ माने जाने वाले एसेट्स में अपनी पूंजी सुरक्षित कर रहे हैं।
यूरोप की जवाबी कार्रवाई की तैयारी
ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (EU) के राजनयिकों ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूरोपीय देश 93 अरब यूरो के अमेरिकी आयात पर जवाबी टैरिफ लगाने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, ईयू अपने ‘एंटी-कोअर्सन इंस्ट्रूमेंट’ का उपयोग कर सकता है, जो विदेशी निवेश और सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।
कैपिटल फ्लाइट: असली खतरा कुछ और है?
सिर्फ टैरिफ ही नहीं, रणनीतिकारों ने एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है—’कैपिटल फ्लाइट’। ड्यूश बैंक के अनुसार, यूरोपीय निवेशकों के पास करीब $8 ट्रिलियन के अमेरिकी बॉन्ड्स और इक्विटी हैं। यदि इस विवाद के कारण यूरोप ने अपनी पूंजी अमेरिका से निकालना शुरू कर दिया, तो यह डॉलर और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए टैरिफ से भी कहीं अधिक घातक साबित हो सकता है।
बाजार की नजर अब इन इवेंट्स पर
आने वाले दिनों में चीन के आर्थिक विकास के आंकड़े, बैंक ऑफ जापान की मीटिंग और दावोस में होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक महत्वपूर्ण होगी। इन मंचों पर व्यापारिक सुरक्षा और टैरिफ विवाद केंद्र में रहने की उम्मीद है। फेडरल रिजर्व के अगले कदम भी यह तय करेंगे कि बाजार इस झटके से कितनी जल्दी उबर पाता है।
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