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ट्रंप की दुनिया को चेतावनी! ग्रीनलैंड कब्जाने दो वरना टैरिफ लगा दूंगा

Trump Greenland Tariff News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को (Donald Trump) दुनिया का भूगोल बदलने की सनक चढ़ी हुई है। उन्होंने वेनेज़ुएला पर अनाधिकारिक कब्जा किया हुआ है और अब उनकी टेढ़ी नज़र दुनिया के सबसे बड़े बर्फीले आइलैंड, ग्रीनलैंड (Greenland) पर है. ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड में कब्जा अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है, इससे पहले की रूस और चीन इसमें कब्जा कर लें, अमेरिका को ग्रीनलैंड कब्ज़ा लेना चाहिए।

ग्रीनलैंड वैसे तो एक स्वतंत्र देश है लेकिन डेनमार्क पर आश्रित है, डेनमार्क NATO का मेंबर है और सभी NATO देश, ट्रंप की इस सम्रज्य्वादी सोच के खिलाफ एकजुट हैं. यूनाइटेड किंगडम, फ़्रांस, डेनमार्क, स्वीडेन, कनाडा, नीदरलैंड्स और इटली जैसे NATO देशों ने जॉइंट स्टेटमेंट देकर ट्रंप का विरोध किया है, सभी देशों का कहना है की वह ग्रीनलैंड पर अमेरिका को कब्जा नहीं करने देंगे।

अब ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए इन देशों की सेना से तो युद्ध नहीं करेंगे इसके लिए उन्होंने फिर से टैरिफ को अपना हथियार बनाया है. ट्रंप का कहना है कि अगर किसी ने भी उन्हें ग्रीनलैंड में कब्जा करने से रोका तो वह उस देश पर भारी टैरिफ लगा देंगे। और जो देश इस प्लान में अमेरिका का सहयोग नहीं करेगा उसे भी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।

ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान यह बयान दिया। हालांकि, उन्होंने साफ नहीं किया कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाएगा और इसके लिए वह किस कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

कनाडा ने कहा- ग्रीनलैंड नहीं कब्जाने देंगे

कनाडा के प्रधान मंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि ग्रीनलैंड के मालिकाना हक का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नहीं है. NATO देश होने के नाते ग्रीनलैंड के तरफ हमारी जिम्मेदारी बरकरार है।“ग्रीनलैंड का भविष्य ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों का फैसला है।” कार्नी ने नाटो सहयोगियों, खासकर अमेरिका से कहा कि वे अपने वादों का सम्मान करें।

देखा जाए तो दुनिया इस स्थिति में नहीं है कि कोई भी ट्रंप को उनकी मनमानी करने से रोक सके, इसका सिर्फ एक ही इलाज है और वो है ग्रीनलैंड के लिए बाकी देश एकजुट होकर ट्रंप की आर्मी का सामना करने के लिए खड़े हो जाएं तब या तो ट्रंप बैकफुट में जाएंगे या फिर NATO देश आपस में लड़कर इस संगठन को खत्म कर देंगे। NATO देशों के बीच संधि यही है कि अगर इनपर कोई हमला करता है तो सभी उस देश की मदद करेंगे और आपस में कभी जंग नहीं लड़ेंगे मगर ट्रंप इस संगठन की संधि को नहीं मान रहे हैं.

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