Trump Global Tariff Effect: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया के कई देशों पर थोपे गए टैरिफ को अवैध बताया और इसे हटाने का आदेश जारी कर दिया। US Supreme Court के आदेश के बाद Donald Trump द्वारा लगाए गए मनमानी Tariff निष्क्रिय हो गए मगर टैरिफ के पीछे दीवाने हो चुके ट्रंप ने नया निकटम अपनाया उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दुनिया के सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ (10% Global Tariff) लगा दिया मगर ये वाला टैरिफ भी 150 दिन से ज्यादा नहीं टिक सकता।
US Supreme Court के आदेश के बाद ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निराशाजनक बताते हुए कहा कि मुझे तो कोर्ट के कुश सदस्यों पर शर्म आ रही है उनके अंदर हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है. इसके बाद ट्रंप ने पोस्ट करते हुए लिखा
“यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैंने अभी-अभी ओवल ऑफिस से सभी देशों पर ग्लोबल 10 फीसदी टैरिफ पर साइन किया है, जो लगभग तुरंत लागू होगा.”
हालांकि ट्रंप के इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिकी नागरिकों को होना है. टैरिफ से अमेरिका का खजाना तो भरेगा मगर दूसरे देशों के उत्पादों पर निर्भर अमेरिकियों को उत्पादों के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। ट्रंप इस वक़्त अपने नागरिकों के बारे में नहीं सोच रहे हैं.
भारत से हुई डील पर कोई बदलाव नहीं
अमेरिकी कोर्ट के आदेश के बाद भी ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ हुई ट्रेड डील वैसे की वैसे ही रहेगी। भारतीय सामानों पर 18% टैरिफ लगेगा। उन्होंने ये भी कहा कि हम भारत को कोई टैरिफ नहीं देंगे सिर्फ वो हमें टैरिफ देगा।
10% ग्लोबल टैरिफ कहां से आया
पूरी दुनिया पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने के लिए ट्रंप ने अमेरिकी कानून ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 का इस्तेमाल किया है. जो अमेरिका को किसी भी देश पर 15% टैक्स लगाने की इजाजत देता है ताकि अमेरिका में बैलेंस-ऑफ-पेमेंट घाटे’ को ठीक किया जा सके.
लेकिन ये Global Tariff, 150 दिनों के लिए ही वैद्य रहता है. इसकी समय सीमा बढ़ाने के लिए सरकार को अमेरिकी पार्लियामेंट यानी ‘कांग्रेस’ से बहुमत प्राप्त करना होता है इसके अलावा ट्रंप को कांग्रेस से सलाह भी लेनी पड़ेगी। अमेरिका के इतिहास में पहली बार ग्लोबल टैरिफ का इस्तेमाल किया गया है. कोर्ट ने फैसले में कहा कि 1977 का कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता. ऐसा केवल कांग्रेस कर सकती है.
