मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां लोकायुक्त संभाग रीवा की टीम ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को एक बड़ी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया है। लोकायुक्त पुलिस ने मुन्नालाल वर्मा, स्थापना प्रभारी बाबू कार्यालय सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग सिंगरौली को ₹5,000 की नगद रिश्वत लेते हुए उनके ही शासकीय कक्ष में रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी बाबू मूल रूप से मऊगंज जिले के हनुमना तहसील अंतर्गत ग्राम कोठार बिछरहटा का रहने वाला है। लोकायुक्त की इस अचानक हुई छापेमारी से पूरे कलेक्ट्रेट परिसर और विभागीय गलियारों में हड़कंप मच गया है।
पूरी घटना के विवरण के अनुसार, नौढिया वीरान जियावन, देवसर निवासी शिकायतकर्ता श्रवण तिवारी एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना देवसर में भृत्य के पद पर सेवारत हैं। उनकी वर्ष 2024 से 2026 तक की वार्षिक वेतन वृद्धि रुकी हुई थी। जब पीड़ित भृत्य ने अपनी रुकी हुई वेतन वृद्धि लगाने और उसके एरियर की राशि निकलवाने के लिए बाबू मुन्नालाल वर्मा से गुहार लगाई, तो आरोपी बाबू ने इस शासकीय काम के एवज में ₹7,000 की रिश्वत की मांग की। परेशान होकर भृत्य श्रवण तिवारी ने 25 मई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा पहुंचकर पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पाटीदार के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलते ही लोकायुक्त एसपी ने मामले का गुप्त सत्यापन कराया, जिसमें आरोपी बाबू द्वारा रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि सही पाई गई। इसके बाद आज 29 मई को एसपी के निर्देशन में एक विशेष ट्रैप दल का गठन किया गया। लोकायुक्त कार्यालय रीवा के ट्रेपकर्ता अधिकारी निरीक्षक एस. राम मरावी और निरीक्षक संदीप भदोरिया के नेतृत्व में टीम ने जनजातीय कार्य विभाग के दफ्तर में जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने ₹7,000 की तय रिश्वत में से ₹5,000 की पहली किस्त आरोपी बाबू मुन्नालाल वर्मा को थमाई, वैसे ही लोकायुक्त की टीम ने धावा बोलकर उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया है और मौके पर आगे की वैधानिक कागजी कार्रवाई जारी है।

