सीधी। मध्यप्रदेश के सीधी जिले से विकास के दावों को मुंह चिढ़ाती एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है। जिले के सिहावल जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पहाड़ी की आदिवासी बस्ती पिछले दो दिनों से पूरी तरह जलमग्न है। लगातार हुई बारिश के बाद बस्ती का करीब आधा किलोमीटर लंबा रास्ता तालाब में तब्दील हो चुका है, जिससे यहाँ का जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। सबसे बदतर हालात स्कूली बच्चों के हैं, जिन्हें जान जोखिम में डालकर घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ से गुजरकर स्कूल जाना पड़ रहा है।
दो दिन तक छूटा स्कूल, तीसरे दिन मजबूरी में उतरे पानी में
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार और गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद बस्ती का मुख्य रास्ता पूरी तरह डूब गया। जलभराव इस कदर था कि बच्चे दो दिनों तक स्कूल ही नहीं जा सके। शुक्रवार को जब स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य की चिंता में बच्चे घुटनों तक भरे पानी को पार कर जैसे-तैसे स्कूल पहुंचने को मजबूर हुए।
पीने के पानी का भी संकट: हैंडपंप पर जमा कीचड़
गाँव के निवासी पुष्पेंद्र साकेत ने बताया कि आफत सिर्फ रास्ते तक सीमित नहीं है। बस्ती में इकलौते पानी के स्रोत यानी हैंडपंप के चारों तरफ भी भारी जलजमाव और कीचड़ हो गया है। ग्रामीणों को पीने का पानी लाने के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है, जिससे महामारी और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
प्रशासन का ढर्रा: शिकायत के बाद भी जिम्मेदार बेखबर!
इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शुक्रवार को ग्रामीणों ने सिहावल एसडीएम राकेश शुक्ला से मामले की शिकायत कर जल निकासी की गुहार लगाई थी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि घंटों बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल यह उठता है कि डिजिटल इंडिया और त्वरित न्याय के दौर में, जब बच्चे घुटने भर पानी में डूबकर स्कूल जा रहे हैं, तब भी क्या प्रशासन सिर्फ कागजी आवेदन का इंतजार करता रहेगा?

