Traditional Indian Snacks Besan Papdi Recipe : त्योहारों का पारंपरिक स्वाद है बुंदेलखंड की बेसनी पापड़िया –बुंदेलखंड की बेसन की पापड़ी-त्योहारों का कुरकुरा स्वाद और परंपरा-भारत के हर क्षेत्र की अपनी अलग पाक-संस्कृति होती है, और बुंदेलखंड अपनी सादगी, स्वाद और टिकाऊ पारंपरिक व्यंजनों के लिए जाना जाता है। इन्हीं में से एक है बेसन की पापड़ी, जो सिर्फ एक नमकीन नहीं बल्कि त्योहारों, पूजा-पाठ और पारिवारिक यादों से जुड़ा पारंपरिक स्वाद है। दिवाली, होली, मकर संक्रांति जैसे पर्वों पर घर-घर बनने वाली यह पापड़ी महीनों तक चलने वाली होती है, इसलिए इसे खास तौर पर पहले से तैयार किया जाता है। चाय के साथ इसका कुरकुरापन और देसी मसालों की खुशबू बुंदेलखंडी जीवनशैली की झलक देती है। बुंदेलखंड में त्योहारों पर बनने वाली बेसन की पापड़ी का पारंपरिक स्वाद, बनाने की विधि, सामग्री और सांस्कृतिक महत्व जानिए। यह कुरकुरा नाश्ता महीनों तक चलता है।
बुंदेलखंड की बेसन की पापड़ी क्या है ?
बेसन की पापड़ी बेसन और गेहूं के आटे या उड़द दाल के आटे के मिश्रण से बनाई जाती है। इसमें हल्के देसी मसाले मिलाकर आटा गूंथा जाता है, फिर पतली पूड़ियों की तरह बेलकर या सांचे से निकालकर मध्यम आंच पर कुरकुरा तला जाता है। यह पापड़ी लंबे समय तक खराब नहीं होती सफर में ले जाने के लिए उपयुक्त होती है पूजा में भोग और त्योहारों के प्रसाद के रूप में प्रयोग होती है।
बेसन की पापड़ी बनाने की मुख्य सामग्री (Ingredients)
बेसन – (Chickpea Flour)
गेहूं का आटा या उड़द दाल का आटा
नमक- (स्वादानुसार)
अजवाइन-हींग
काली मिर्च या हल्का मसाला
तेल – (मोयन और तलने के लिए)
बेसन की पापड़ी बनाने की पारंपरिक विधि
आटा तैयार करना-बेसन और आटे (या उड़द दाल के आटे) को छान लें। इसमें नमक, अजवाइन, हींग और थोड़ा तेल डालकर अच्छी तरह मिला लें, ताकि पापड़ी कुरकुरी बने।
गूंथना-थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम लेकिन सख्त आटा गूंथें। ऊपर से हल्का तेल लगाकर ढक दें और 1–2 घंटे के लिए रख दें।
लोई बनाना-तैयार आटे से छोटी-छोटी लोइयां बना लें।
बेलना या सांचे से निकालना-लोइयों को पतला बेल लें या पापड़ी मशीन/सांचे से दबाकर निकालें। चाकू से हल्के कट भी लगाए जा सकते हैं, ताकि तलते समय फूले नहीं।
तलना-कढ़ाही में तेल गरम करें और मध्यम आंच पर पापड़ियों को धीरे-धीरे सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें।
बेसन की पापड़ी की खासियत और उपयोग
त्योहारों की पहचान-दिवाली, होली, मकर संक्रांति जैसे पर्वों पर यह नमकीन जरूर बनाई जाती है।
लंबे समय तक सुरक्षित-सही तरीके से रखने पर यह महीनों तक खराब नहीं होती, इसलिए पहले से बनाई जाती है।
चाय के साथ परफेक्ट-सुबह या शाम की चाय के साथ इसका स्वाद और कुरकुरापन लाजवाब लगता है।
पूजा और यात्रा में उपयोग
इसे पूजा में भोग के रूप में भी चढ़ाया जाता है और सफर में ले जाना भी आसान होता है। बुंदेलखंडी संस्कृति में बेसन की पापड़ी का बहुत महत्व मन जाता है। बुंदेलखंड की पापड़ी केवल स्वाद नहीं, बल्कि संयम, आत्मनिर्भरता और परंपरा का प्रतीक है। जब आधुनिक स्नैक्स उपलब्ध नहीं थे, तब ऐसी टिकाऊ नमकीनें ही त्योहारों और यात्राओं का सहारा होती थीं। आज भी यह व्यंजन पीढ़ियों से रसोई में अपनी जगह बनाए हुए है।
निष्कर्ष (Conclusion)-बुंदेलखंड की बेसन की पापड़ी एक साधारण सामग्री से बनने वाला लेकिन गहरे सांस्कृतिक महत्व वाला व्यंजन है। इसका कुरकुरा स्वाद, लंबे समय तक चलने की क्षमता और त्योहारों से जुड़ाव इसे खास बनाता है। अगर आप पारंपरिक भारतीय स्वादों को संजोना चाहते हैं, तो यह पापड़ी बुंदेलखंड की आत्मा को समझने का एक स्वादिष्ट तरीका है।

