Toxic teaser controversy: आजकल फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का बड़ा मुद्दा टॉक्सिक फिल्म बना हुआ है दरअसल साउथ सुपरस्टार यश की अपकमिंग फिल्म ‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा लेकिन इसके साथ ही एक बोल्ड सीन को लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। महिला संगठन और राजनीतिक दल का कहना है कि टीजर में दिखाया गया सीन पब्लिक के देखने के लिए सही नहीं है।
टीज़र रिलीज़ होते ही क्यों खड़ा हो गया विवाद
यश की फिल्म टॉक्सिक का टीजर 8 जनवरी 2026 को सामने आया था। टीजर में यश और एक महिला के बीच कार के अंदर एक इंटीमेट सीन दिखाया गया था जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कुछ दर्शकों ने इस फिल्म की कहानी का एक हिस्सा बताया जबकि कई लोगों ने तो इसे अनावश्यक और आपत्तिजनक सीन कहा। इसी सीन से टॉक्सिक टीज़र फिल्म की कंट्रोवर्सी की शुरुआत होने लगी।
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AAP महिला विंग ने जताई आपत्ति
टॉक्सिक टीजर कंट्रोवर्सी उस समय और भी ज्यादा गंभीर हो गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) कि कर्नाटक महिला विंग ने इस टीज़र के खिलाफ अपनी एक शिकायत दर्ज कराई। महिला विंग का ऐसा कहना है कि ऐसे movie scene महिलाओं की गरिमा को काफी ठेस पहुंचाते हैं, और समाज पर इसका काफी गलत असर भी पड़ता है संगठन ने ऐसी मांग की है कि इस तरह के कंटेंट पर सख्त निगरानी होनी चाहिए।
CBFC की भूमिका को लेकर उठे सवाल
फिल्म के इस विवाद के बिछिया बात सामने आई की फिल्म का टीजर्स सीबीएफसी के द्वारा सर्टिफाइड नहीं है। मौजूदा नियम के अनुसार प्रमोशन कंटेंट के लिए सेंसर का सर्टिफिकेशन जरूरी नहीं होता है लेकिन टॉक्सिक टीजर कॉन्ट्रोवर्सी ने इन सभी नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोगों का ऐसा मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाले टीजर और ट्रेलर के लिए भी स्पष्ट रूप से निर्देश होने चाहिए।
सोशल मीडिया का रिएक्शन, ट्रोलिंग की चपेट में आई अभिनेत्री
इस फिल्म को लेकर जैसे ही विवाद शुरू हुआ इसका असर सोशल मीडिया पर भी दिखने लगा। कुछ यूजर्स ने फिल्म मेकर्स का तो सपोर्ट किया तो वहीं कई लोगों ने इस इंटीमेट सीन को लेकर अपनी नाराजगी भी बताई है। विवाद सीन में नजर आई विदेशी अभिनेत्री Beatriz Taufenbach को काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा इसके बाद उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर दिया।
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कला की आज़ादी या सामाजिक मर्यादा? यहीं से शुरू होती असली बहस
Toxic teaser controversy मैं एक बार फिर से यह बहस छेड़ दी है की फिल्मों में बोल्ड कंटेंट की सीमाएं कहां तक होनी चाहिए एक पक्ष से क्रिएटिव रूप से आजादी मानता है जबकि दूसरा पक्ष सार्वजनिक जिम्मेदारी की बात कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना जरूरी होगा कि सीबीएसई या सरकार इस तरह के कंटेंट को लेकर नई गाइडलाइंस बनाती है या नहीं।

