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Tilak Varma के Retired Out होने जात-पात!, तिलक वर्मा की जाति क्या है?

Tilak Varma Retired Out: IPL 2025 में मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स (MI Vs LSG) के बीच हुए एक रोमांचक मुकाबले ने क्रिकेट से ज्यादा सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया। ये मैच 4 अप्रैल 2025 को लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी एकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया, जहां लखनऊ ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 203/8 का स्कोर खड़ा किया। मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) की टीम इस लक्ष्य का पीछा करते हुए 12 रन से हार गई, और अंतिम स्कोर रहा 191/9। लेकिन असली ड्रामा तब शुरू हुआ, जब मुंबई ने अपने बल्लेबाज तिलक वर्मा (Tilak Varma Retired Out) को 19वें ओवर में 25 रन (23 गेंद) पर रिटायर्ड आउट कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग क्रिकेट को छोड़कर जाति का राग अलापने लगे। उनका दावा? “ब्राह्मण रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya)ने पिछड़ी जाति के तिलक वर्मा (Tilak Varma Caste) का करियर खत्म करने के लिए उसे रिटायर्ड आउट किया!” अरे भाई, क्रिकेट में गेंद और बल्ला देखा जाता है, जन्मपत्री नहीं!

https://twitter.com/surya_samajwadi/status/1908380013214171252

मैच का हाल कुछ यूं था कि लखनऊ की पारी में मिचेल मार्श (60 रन) और एडन मार्करम (53 रन) ने शानदार बल्लेबाजी की, जबकि मुंबई के कप्तान हार्दिक पंड्या ने 5 विकेट झटककर अपनी गेंदबाजी का दम दिखाया। जवाब में मुंबई की ओर से सूर्यकुमार यादव (67 रन) और नमन धीर (46 रन) ने कोशिश की, लेकिन तिलक वर्मा की धीमी पारी ने रन रेट पर ब्रेक लगा दिया। 204 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जब 7 गेंदों में 24 रन चाहिए थे, तब टीम को बड़े शॉट्स की जरूरत थी। तिलक उस दिन लय में नहीं दिखे, और कोच महेला जयवर्धने ने उन्हें बाहर बुलाकर मिचेल सैंटनर को मौका दिया। ये फैसला गेम की सिचुएशन को देखते हुए लिया गया, लेकिन सोशल मीडिया के कुछ शेरलॉक होम्स ने इसमें जातिवाद का एंगल ढूंढ निकाला।

https://twitter.com/AnilYadavmedia1/status/1908368214016356528

अब आते हैं इस नफरती तमाशे पर। कुछ लोगों ने ट्वीट करना शुरू कर दिया कि रोहित शर्मा और हार्दिक पंड्या ने तिलक वर्मा को इसलिए रिटायर्ड आउट किया, क्योंकि वो कथित तौर पर “पिछड़ी जाति” से हैं। एक यूजर ने तो लिख ही डाला, “तिलक का करियर खत्म करने की साजिश है, ब्राह्मणों का षड्यंत्र!” अरे वाह, क्या गजब का विश्लेषण है! लगता है इन भाईसाहब ने स्कोरकार्ड की जगह जाति-पत्रिका पढ़ ली। क्रिकेट में रिटायर्ड आउट का फैसला टैक्टिक्स से होता है, न कि किसी की जाति देखकर। तिलक उस दिन बड़े शॉट्स नहीं खेल पा रहे थे, और टीम को आखिरी ओवर्स में हिटर चाहिए था—ये इतना साधारण गणित है कि इसे समझने के लिए दिमाग की जरूरत है, न कि नफरत की चश्मे की।

https://twitter.com/shweta9454/status/1908410811820753370

सच तो ये है कि क्रिकेट में कोई जाति नहीं देखता। बल्ला बोलता है, गेंद उड़ती है, और स्कोरबोर्ड तय करता है कि कौन जीता, कौन हारा। रोहित शर्मा उस दिन मैदान पर थे ही नहीं, वो घुटने की चोट की वजह से बाहर थे। हार्दिक पंड्या और कोच जयवर्धने ने वो फैसला लिया, जो उन्हें उस पल सही लगा। तिलक वर्मा एक शानदार खिलाड़ी हैं, जिन्होंने T20I में शतक जड़े हैं, और उनका करियर खत्म होने की बात करना हंसी का पात्र है। लेकिन सोशल मीडिया के कुछ कीबोर्ड वॉरियर्स को लगता है कि क्रिकेट स्टेडियम में भी पंचायत बैठती है। एक ने लिखा, “पंड्या और रोहित ने तिलक को अपमानित किया!” अरे भाई, अपमानित तो वो गेंदबाज होता है, जिसे तिलक छक्का मारता है, न कि ऐसा फैसला लेकर!

https://twitter.com/Cawnporewale/status/1908246078077415687

हंसी तब और आती है, जब लोग भूल जाते हैं कि रिटायर्ड आउट का नियम नया नहीं है। IPL में पहले भी रविचंद्रन अश्विन, साई सुदर्शन और अथर्व तायड़े जैसे खिलाड़ी रिटायर्ड आउट हो चुके हैं—क्या वो भी जाति के आधार पर हुए थे? नहीं न! ये फैसला गेम की जरूरत के हिसाब से होता है, न कि किसी की कुंडली मिलाकर। फिर भी, कुछ लोगों ने इसे इतना तूल दे दिया कि लग रहा था मानो क्रिकेट का मैदान नहीं, कोई जातिगत जंग का अखाड़ा हो। भारत में लोग मजाक उड़ा रहे हैं, “अगली बार प्लेइंग इलेवन जाति देखकर बनानी चाहिए!” तो न्यूजीलैंड के फैंस कह रहे हैं, “हमें तो बस पता है कि लाइट चली गई थी, बाकी ड्रामा आपका है!”

तिलक वर्मा की जाति क्या है

Tilak Varma Caste: तिलक वर्मा का पूरा नाम नंबूरी ठाकुर तिलक वर्मा (Namburi Thakur Tilak Verma) है. वो हैदराबाद से नाता रखते हैं और ब्राह्मण परिवार में जन्मे हैं. जो लोग तिलक वर्मा के नाम पर PDA-PDA कर रहे हैं उन्हें कुछ मालूम ही नहीं है.

तो जनाब, इस मैच में हारा तो मुंबई इंडियंस था, लेकिन असली हार नफरत फैलाने वालों की हुई। तिलक वर्मा का बल्ला फिर बोलेगा, और वो मैदान पर जवाब देंगे। बाकी सोशल मीडिया के जातिवादी ज्ञानियों से बस यही कहना है—क्रिकेट को क्रिकेट रहने दो, इसमें अपनी गंदी सियासत मत घुसाओ। बल्ले से रन बनते हैं, जाति से नहीं!

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