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सतना : बिड़ला सीमेंट फैक्ट्री के रोपवे की तीन ट्रॉलियां आबादी वाले क्षेत्र की सड़क पर गिरीं, ग्रामीणों में आक्रोश

Three trolleys from the Birla Cement factory ropeway in Satna fell onto a road in a populated area.Three trolleys from the Birla Cement factory ropeway in Satna fell onto a road in a populated area.

Three trolleys from the Birla Cement factory ropeway in Satna fell onto a road in a populated area.

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक बेहद गंभीर दुर्घटना की खबर सामने आई है, जहां रविवार दोपहर बिड़ला सीमेंट फैक्ट्री के रोपवे की तीन ट्रॉलियां अचानक टूटकर नीचे मुख्य सड़क पर गिर गईं। यह हादसा नैना सगमनिया की खदानों से फैक्ट्री तक नियमित माल ढुलाई के दौरान हुआ। गनीमत यह रही कि जिस समय ट्रॉलियां भारी-भरकम मलबे के साथ नीचे गिरीं, उस वक्त सड़क पर कोई ग्रामीण या वाहन नहीं गुजर रहा था। इस वजह से एक बहुत बड़ा हादसा टल गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने रोपवे की सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अचानक मची अफरा-तफरी, ग्रामीणों ने लगाए लापरवाही के आरोप

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खदानों से फैक्ट्री तक माल ले जाते समय अचानक एक ट्रॉली का संतुलन बिगड़ा और वह टूट गई, जिसके बाद एक के बाद एक कुल तीन ट्रॉलियां सीधे नीचे सड़क पर आ गिरीं। जोरदार आवाज के साथ हुए इस हादसे से आसपास के पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जिस स्थान पर यह घटना हुई, उसके ठीक नीचे से ग्रामीण आवागमन के लिए एक मुख्य सड़क गुजरती है। हादसे के बाद बेला और बठिया गांव के ग्रामीणों ने बिड़ला प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से आबादी वाले क्षेत्र के ऊपर से इस जर्जर रोपवे का संचालन किया जा रहा है और सुरक्षा तथा पर्यावरण नियमों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि इस खतरनाक रोपवे के संबंध में पहले भी कई बार जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से लिखित शिकायतें की गई थीं, लेकिन आर्थिक साठगांठ या लापरवाही के चलते आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने पूरे रोपवे सिस्टम के संचालन को तुरंत रोकने, इसकी उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने और सभी सुरक्षा मानकों की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की है। साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में प्रबंधन या जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी मुकदमा दर्ज किया जाए। फिलहाल, घटना के सटीक तकनीकी कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हो सका है और न ही प्रशासन व कंपनी प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत बयान जारी किया गया है।

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