विजय दशमी। साल 2026 में महानवमी और विजयादशमी (दशहरा) का एक अद्भुत और बेहद खास महासंयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, तिथियों के उतार-चढ़ाव की वजह से इस बार कई क्षेत्रों में महानवमी का समापन और दशहरा का उत्सव एक ही दिन, यानी 20 अक्टूबर 2026, दिन मंगलवार को संपन्न हो रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महानवमी के दिन मां दुर्गा की विधि-विधान से उपासना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और देवी मां की विशेष कृपा बनी रहती है। साथ ही इस दिन कन्या पूजन किया जाता है, जो बेहद खास होता है। वहीं, दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जिसे पूरे देश में हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता है। ऐसे में यह संयोग भक्तों के लिए और भी खास होने वाला है।
समझे ज्योतिषगणना
अब चूंकि नवमी तिथि 19 अक्तूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी, इसलिए 19 अक्तूबर को सुबह 10 बजकर 52 मिनट से आप नवमी कन्या पूजन कर सकते हैं। यह तिथि 20 अक्तूबर के दिन दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक प्रभावी रहेगी। ऐसे में आप इस समय भी कन्या पूजन कर सकते है। वहीं, दशमी तिथि 20 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर शुरू होकर 21 अक्तूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। ज्योतिषियों के अनुसार, दशहरा मनाने के लिए दशमी तिथि पर प्रदोष काल का संयोग महत्वपूर्ण होता है। इसलिए 20 अक्तूबर को ही दशहरा मनाया जाएगा।
क्यों बन रहा है यह महासंयोग?
हिंदू पंचांग के अनुसार, तिथियों का घटना और बढ़ना सूर्य और चंद्रमा की गति पर निर्भर करता है। इस वर्ष तिथियों का गणित कुछ इस प्रकार बैठ रहा है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर शुरू हो रही है, जो 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को मुख्य नवमी है, लेकिन 20 अक्टूबर को दोपहर तक नवमी होने से इस दिन भी कन्या पूजन किया जा सकेगा। दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी।
महासंयोग का कारण
शास्त्रों के अनुसार, दशहरा का पर्व उस दिन मनाया जाता है जब दशमी तिथि अपराह्न काल (दोपहर के समय) और प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में व्याप्त हो। 20 अक्टूबर को दोपहर 12.50 के बाद पूरी दोपहर और शाम को दशमी तिथि उपलब्ध है। इसी वजह से 20 अक्टूबर को उदया तिथि में नवमी और दोपहर के बाद दशमी का महासंयोग बन रहा है।
दशहरा 2026 के दुर्लभ और शुभ योग
इस वर्ष दशहरा केवल तिथियों के संयोग के कारण ही खास नहीं है, बल्कि इस दिन ब्रह्मांड में कई अन्य शुभ योग भी बन रहे हैं। ज्योतिष में रवि योग को बेहद प्रभावशाली और नकारात्मकताओं को नष्ट करने वाला माना गया है। 20 अक्टूबर को पूरे दिन रवि योग का प्रभाव रहेगा। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का प्रिय नक्षत्र श्रवण इस दिन सुबह से लेकर शाम 06.02 बजे तक रहेगा, जो किसी भी नए काम की शुरुआत या खरीदारी के लिए अत्यंत शुभ है।
पूजा और रावण दहन के शुभ मुहूर्त (20 अक्टूबर 2026)
महत्वपूर्ण विधान – शुभ समय (मुहूर्त)
कन्या पूजन (नवमी) – 20 अक्टूबर, दोपहर 12.50 से पहले
अपराह्न पूजा (दशहरा) – दोपहर 01.14 से दोपहर 03.30 तक
विजय मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ) – दोपहर 01.59 से दोपहर 02.45 तक (अस्त्र-शस्त्र पूजन के लिए)
प्रदोष काल (रावण दहन) – शाम 05.47 बजे सूर्यास्त के बाद से शुरू

