रीवा में मौजूद है ये चमत्कारिक देवी माताओं के मंदिर, नवरात्रि में पहुच रहा भक्तों का सैलाब

रीवा। इन दिनों नवरात्रि उत्सव की धूम है और देवी माताओं के मंदिरों में आस्था का सैलाब पहुच रहा है। अल सुबह 4 बजे से माता के भक्त पहुच कर पूजा-अर्चना कर रहे है। रीवा में देवी माताओं के कई चमत्कारिक मंदिर मौजूद है। यहां भक्तों की अपार श्रद्धा है। प्राचीन और प्रसिद्ध देवी मंदिरों में विशेषकर नवरात्र के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

450 साल पुराने है मंदिर

यू तो माता के भक्त 9 दिनों तक घर-घर में माता रानी की विशेष पूजा-अर्चना कर रहे और अपने कुल देवी माता को जल आदि चढ़ा कर खुसहाली के लिए प्रार्थना कर रहे है, लेकिन सबसे प्रमुख मंदिरों में रानी तालाब का 450 साल पुराना माँ कालिका मंदिर, गोविंदगढ़ के पास स्थित खंधो देवी मंदिर और अष्टभुजी मंदिर शामिल हैं, जो अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं।

मां कालिका मंदिर

रानी तालाब कालिका मंदिर यह रीवा शहर में स्थित सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहाँ 450 साल पुरानी माँ कालिका की प्रतिमा है। मान्यता है कि इसे महाराजा भाव सिंह की रानी अजब कुमारी ने 1670-75 के बीच स्थापित करवाया था। यह एक पर्यटन स्थल भी है। माता कालिका का भक्तों पर अपार स्नेह रहता है। राजपरिवार के लोग माता की पूजा-अर्चना करने यहां पहुचते है। माता का सोलह श्रृगार किया जाता है और राज परिवार से माता को आभूषण अष्टमी तिथी पर चढ़ाए जाते है।

खंधो देवी मंदिर

यह मंदिर रीवा जिले के गोविंदगढ़ कस्बे के पास है और लगभग 20-25 किमी की दूरी पर स्थित है। यह एक अत्यंत प्राचीन आदिशक्ति माता का मंदिर है, जो लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है।

अष्टभुजी मंदिर

यह एक प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर है, जहाँ श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि में तो भक्तों का सैलाब उमड़ता है। यहां आसपास के दर्जनों गांव के ग्रामीण अपनी आस्था लेकर माता के दरवार में पहुचे है और पूजा-अर्चना करने के साथ ही अपनी मान्यताएं पूरी करते है। अन्य मंदिरों में कुइयाकला में देवी माता मंदिर और आस-पास के क्षेत्रों में स्थित विभिन्न सिद्ध पीठ।

विशेषता

नवरात्रि महोत्सवः इन मंदिरों में चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान विशेष श्रृंगार, महाआरती और मेले जैसा माहौल होता है।
रानी तालाब का इतिहासः माना जाता है कि माँ कालिका की प्रतिमा व्यापारियों के साथ आई थी और यहाँ स्थापित होने के बाद हटी नहीं।

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