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इस लिए खात होता है देश का बजट, जिसमें सरकार करती है एक साल की तैयारी

बजट 2026। भारत का केंद्रीय बजट देश की आर्थिक दिशा और नीतियों का सबसे अहम दस्तावेज माना जाता है। भारत सरकार आगामी 1 फरवरी 2026 को देश का नया बजट पेश करने की तैयारी में है। सरल शब्दों में कहें तो बजट सरकार की अनुमानित आय और व्यय का एक वार्षिक वित्तीय विवरण होता है। यह दस्तावेज़ इस बात का खाका पेश करता है कि आने वाले एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में सरकार पैसा कहां से जुटाएगी और उसे किन क्षेत्रों में खर्च करेगी।

देश वासियों को बड़ी उम्मीदें

बजट 2026 से देश को आर्थिक विकास, रोजगार, महंगाई नियंत्रण और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती देने जैसी बड़ी उम्मीदें हैं। वैश्विक अनिश्चिताओं और घरेलू चुनौतियों के दौर में यह बजट भारत की आर्थिक सेहत और भविष्य की प्राथमिकताओं को तय करने का काम करेगा। निवेशकों, उद्योग जगत और आम नागरिकों की नजरें इस बजट पर टिकी हुई हैं और उनको इससे काफी उम्मीदें हैं।

आजादी से पहले प्रस्तुत हुआ था बजट

भारत का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश शासन के दौरान पेश किया गया था। आजादी के बाद 26 नवंबर 1947 को स्वतंत्र भारत का पहला बजट पेश हुआ, जिसे देश के पहले वित्त मंत्री आरके शणमुखम चेट्टी ने संसद में रखा। यह बजट स्वतंत्र हुए नए भारत की आर्थिक नींव रखने वाला पहला बजट था।

बजट के मुख्य घटक

बजट में सरकार मुख्य रूप से टैक्स और शुल्कों के जरिए जुटाए जाने वाले राजस्व का विवरण देती है। साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं (सब्सिडी) के लिए आवंटन तय किया जाता है।

बजट का महत्व और उद्देश्य

आर्थिक स्थिरता- बजट के माध्यम से निवेश को बढ़ावा दिया जाता है और महंगाई को नियंत्रित करने के प्रयास किए जाते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था संतुलित रहे।
संसाधनों का आवंटन- यह प्राथमिकता तय करता है कि सड़क, रेलवे और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में धन का वितरण कैसे हो।
सामाजिक कल्याण- गरीबी और बेरोजगारी कम करने के लिए बजट में विशेष योजनाएं बनाई जाती हैं। अमीरों पर कर लगाकर और गरीबों को सब्सिडी देकर आय का पुनर्वितरण किया जाता है।
रोजगार सृजन- इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों में निवेश के जरिए बजट नए रोजगार के अवसर पैदा करने का रोडमैप तैयार करता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही- संसद में बजट पेश कर सरकार जनता के प्रति अपने खर्चों और नीतियों के लिए जवाबदेह बनती है।

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