दीपावली। रोशनी और धूम-धड़ाके का पर्व दीपावली मनाई जा रही है। दीपावली का महत्व अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। यह भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है, और धन की देवी लक्ष्मी और गणेश की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसके साथ ही, यह त्योहार खुशी, एकता, और जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है, जो घरों को सजाने और प्रियजनों के साथ मिलकर मनाने से और भी खास हो जाता है। दीपावली संस्कृत शब्द से बना है। दीपों की पंक्ति या दीपों की श्रृंखला संस्कृत में, दीप का अर्थ है प्रकाश या दीपक, और आवली का अर्थ है पंक्ति या रेखा।
दीपावली का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो दर्शाता है कि कैसे दीपक का प्रकाश अंधकार को दूर करता है। मान्यता है कि भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद 14 साल के वनवास से लौटकर अयोध्या में दिवाली के दिन प्रवेश किया था। इस अवसर पर अयोध्या वासी पूरी नगरी में दीपक जलाकर रोशनी किए और अपने राजा राम के घर लौटने की खुशियों में उत्सव मनाए थें।
इस तरह की प्रचालित है कथाएं
रामायण के अनुसार, भगवान राम ने लंकापति रावण को हराकर देवी सीता को मुक्त कराया और १४ साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे। इस शुभ अवसर पर, अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत के लिए दीप जलाए, जो आज भी दीपावली का एक मुख्य आधार है।
भगवान कृष्ण और नरकासुर
भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध कर १६,००० से अधिक स्त्रियों को उसके चंगुल से मुक्त कराया था। इस जीत को अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।
देवी लक्ष्मी का प्रकट होना
हिंदू धर्म के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या को क्षीरसागर से देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं और उन्होंने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया था।
भगवान विष्णु और राजा बलि
एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि को छल से पाताल लोक भेज दिया था और राजा बलि को पाताल लोक का राजा बनाया था। इस उपलक्ष्य में भी दीपावली मनाई जाती है।
जैन धर्म में दीपावली
जैन धर्म में दीपावली को महावीर निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह उस दिन का प्रतीक है जब भगवान महावीर ने मोक्ष प्राप्त किया था। इस दिन दिगंबर जैन मुनि और हजारों भक्त दीप प्रज्वलित कर निर्वाण दिवस मनाते हैं।
बंदी छोड़ दिवस
सिख समुदाय इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। यह दिन गुरु हरगोविंद सिंह जी की रिहाई की याद में मनाया जाता है, जिन्हें मुगल बादशाह जहांगीर ने बंदी बना लिया था।
