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गर्मी में ऐसे बनती है आंधी-तूफान-बारिश की स्थित, मौसम का दिखता है रौद्र रूप

वेदर लेटेस्ट न्यूज। एक सप्ताह पूर्व तक खास तौर से उत्तर-पूर्वी भारत के लोग जलाने वाली धूंप तथा भीषण गर्मी से हाफ रहे थें, तपती गर्मी से हर कोई परेशान और हलाकान रहा, इसी बीच आंधी-तूफान और बारिश का दौर शुरू हो गया। बदला हुआ यह मौसम तपती गर्मी से राहत दे रहा है और तपिश भरी धूंप से लोगों का बचाव हो रहा है। गर्मी के इस महीने में आखिर कार भीषण गर्मी के बीच आंधी-बारिश की क्या है वजह। इसकों लेकर मौसम वैज्ञानिकों का तर्क है कि तेज गर्मी और लू के बीच मौसम का बदलना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो मुख्य रूप से वायुमंडलीय अस्थिरता के कारण होती है। ये आंधी-तूफान गर्मी के मौसम की प्री-मानसून गतिविधियां हैं, जो भीषण गर्मी से राहत दिलाती हैं।

मौसम कब बदलता है?

आमतौर पर, लगातार कई दिनों की भीषण गर्मी (40-45 डिग्री के तापमान) के बाद मौसम में बदलाव आता है। यह बदलाव अक्सर दोपहर या शाम के समय होता है, जब जमीन बहुत अधिक गर्म हो जाती है। मई-जून के महीनों में यह स्थिति उत्तर और मध्य भारत में अधिक देखी जाती है।

तेज गर्मी में आंधी-तूफान क्यों आते हैं? (वैज्ञानिक कारण)

कन्वेक्शन- तेज धूप से जमीन के पास की हवा अत्यधिक गर्म होकर हल्की हो जाती है और तेजी से ऊपर उठती है।
वायुमंडलीय अस्थिरता- जब जमीन के पास की यह गर्म हवा ऊपर की ठंडी हवा की परत से टकराती है, तो अस्थिरता पैदा होती है।
नमी- बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाली नम हवाएं इस अस्थिरता को बढ़ा देती हैं, जिससे बादल बनते हैं।
कम दबाव का क्षेत्र- गर्म क्षेत्र में हवा ऊपर उठने से वहां कम दबाव बन जाता है। आसपास के ठंडे और उच्च दबाव वाले क्षेत्रों से हवा तेजी से इस खाली जगह को भरने के लिए दौड़ती है, जिससे आंधी आती है।
पश्चिमी विक्षोभ- कभी-कभी अफगानिस्तान-पाकिस्तान के रास्ते से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत में अचानक आंधी-बारिश का कारण बनते हैं।

आंधी और तूफान के रूप

धूल भरी आंधी- जब नमी की कमी हो, तो केवल तेज हवाएं धूल लेकर आती हैं।
तूफान-गरज-चमक- नमी की उपस्थिति में ये आंधी-तूफान के साथ बारिश और ओलावृष्टि में बदल जाते हैं।

मई 2026 के ताजा अपडेट के अनुसार

मध्य भारत/रीवा। 4 मई से मौसम ने करवट ली है, जहाँ 8 मई तक रुक-रुक कर बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि की संभावना है।
उत्तर और पश्चिम भारत- 26-27 अप्रैल के बाद से प्री-मानसून बारिश (धूलभरी आंधी, हल्की बारिश) ने गर्मी से कुछ राहत देनी शुरू की थी।
बदलाव के संकेत- जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो स्थानीय स्तर पर हवाओं में नमी के साथ मिलकर बादल बनते हैं और आंधी-तूफान के साथ बारिश होती है, जिससे पारा 2-3 डिग्री तक गिर सकता है।

मौसम बदलने की प्रक्रिया

हीटवेव- राजस्थान, बलूचिस्तान से शुष्क गर्म हवाएं आती हैं।
नमी का प्रवेश- समुद्र से नमी वाली हवाएं आती हैं।
मौसम प्रणाली- पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से बारिश व आंधी आती है

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