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इस कला आर्ट ने रीवा को दिलाई पहचान, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी मुरीद, विदेशों में है डिमांड

रीवा। सुपारी का यू तो उपयोग पूजा-पाठ एवं पान-गुटका के शैकिन खाने में करते है। उस हिसाब से सुपारी स्वाद और भक्ति से परिपूर्ण है, लेकिन कला प्रेमी ने इस सुपारी को तरह-तरह के आकार देकर कला आर्ट के क्षेत्र में रीवा की पहचान दिलाई है। जी है हम बता कर रहे है, सुपारी से बनाए जाने वाले खिलौनों कि।
तीन पीढ़िया जुड़ी है इस कला आर्ट से
रीवा शहर के फोर्ट रोड में रहने वाले कुदेर परिवार की तीन पीढ़िया सुपारी से खिलौने बना रही है। उन्होने सुपारी से गणेश, लक्ष्मी की सबसे ज्यादा प्रतिमा बनाई है तो डिमांड के हिसाब से वे सुपारी से तैयार होने वाले उपहार बनाते है। बताते है कि उनके परिवार के लोगो ने सबसे पहले सुपारी से सिंदूर की डिब्बी बनाई थी। उसे रीवा राज्य के दरवार में उपहार दिया था। इसके लिए उन्हे रीवा राज्य दरवार में ईनाम दिया गया था। जिसके बाद सुपारी की इस कला आर्ट की पहचान हुई।
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी थी मुरीद
बताते है कि 1968 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी रीवा आई थी। तब उन्हे सुपारी से बनी प्रतिमा उपहार के रूप दी गई थी। इंदिर गांधी इस कला को देखकर काफी खुस हुई और उन्होने कलाकार को सम्मान भी दिलाया था। इंदिरा गांधी सुपारी के खिलौनों को अंतर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पूरा प्रयास की।
रीवा में बनाए जाने वाले सुपारी के खिलौनों की सुंदरता देश ही नही विदेशों में भी है। जानकारी के तहत फ्रांस और जर्मनी जैसे देशो में सुपारी आर्ट की डिमांड रही है। तो वही भारत में सेलिब्रेटी से लेकर राजनेताओं को उपहार के रूप में सुपारी से बनी गणेश प्रतिमा आदि दी जाती है।

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