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रीवा में मौजूद है सैकड़ों वर्ष पुराने राधा-कृष्ण के ये मंदिर, आस्था और भक्ति से है सराबोर

रीवा। भादो मास के अष्टमी तिथी पर भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। रीवा में भगवान कृष्ण के सैकड़ों वर्ष पुराने मंदिर मौजूद है। यहां आज भी उनकी पूजा-अर्चना पूरे भक्ति भाव के साथ कृष्ण भक्त कर रहे है। इनमें से डेढ़ सौ वर्ष पुराना लखौरी बाग का राधा-कृष्ण मंदिर है। यहां भगवान की भव्य प्रतिमा स्थापित है। उनके साथ ही राधा रानी और गायों के साथ ग्वालन की भव्य प्रतिमाएं स्थापित है।

रीवा की महारानी ने करवाया था निर्माण

लखौरी बाग मंदिर, यह लगभग डेढ़ सौ साल पुराना ऐतिहासिक मंदिर है। रीवा राजघराने के महाराज रघुराज प्रताप सिंह की महारानी सौभाग्य कुंवरि राणावत ने इसकी स्थापना की थी जो कृष्ण भक्ति में लीन रहती थीं। उन्होंने ही इस पवित्र स्थल पर राधा-कृष्ण का यह मंदिर स्थापित किया। मंदिर के आसपास करीब 52 एकड़ क्षेत्र में फल-फूलों का एक सुंदर उद्यान और रघुराज सागर बांध भी बनवाया गया था। यहाँ कृष्ण जन्माष्टमी और अन्य पावन पर्वों पर विशेष उत्सव व उल्लास देखने को मिलता है।

बनाई गई थी भव्य गौशाला

लखौरी बाग के राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में गौशाला भी बनवाई गई थी। जिसमें गायों का निवास था और तालाब में गायों का चरण होता था। यह पूरा क्षेत्र किसी वृदावन धाम से कंम नजर नही आता था। जंहा भव्य मंदिर और गौशाला में गायों की हूंकर से पूरा वातारण कृष्ण भक्ति का बंया करता था।

रीवा का राधा वल्लभ मंदिर

यह मंदिर रीवा शहर के एक व्यस्त और मुख्य इलाके के पास स्थित है। यहाँ भगवान कृष्ण और राधा रानी की सुंदर और मनमोहक प्रतिमा विराजमान है। इस मंदिर में स्थानीय श्रद्धालु रोजाना दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। त्योहारों के विशेष अवसरों पर यहाँ विशेष सजावट और भीड़ होती है।
चोरहटा के मुख्य मार्ग पर स्थित यह भव्य मंदिर श्रद्धालुओं के बीच शांति और आस्था का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। प्रणामी मंदिर (परमहंस नगर, रतहरी) यहाँ भी श्री राधा कृष्ण जी का सुंदर और शांत मंदिर है जो स्थानीय भक्तों के बीच बहुत प्रसिद्ध है।

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