The Worship of the Destroyer of Negativity and Fear on Saptami : सप्तमी पर भय का नाश करने वाली-माँ कालरात्रि की आराधना-चैत्र नवरात्रि का पर्व शक्ति साधना का परम उत्कृष्ट अवसर होता है। इस पावन पर्व की सप्तमी तिथि माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि को समर्पित है। इन्हें देवी के सबसे उग्र और प्रचंड रूपों में से एक माना जाता है, जो ब्रह्मांड की समस्त नकारात्मक शक्तियों, अज्ञान रूपी अंधकार और भय का संहार करती हैं। इस दिन विधि-विधान से इनकी पूजा करने से भक्तों के जीवन से सभी प्रकार की बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और अकाल मृत्यु का भय भी दूर होता है। आइए जानते हैं माँ कालरात्रि की विशेष पूजा विधि, मंत्र और इस दिन के महत्व के बारे में। चैत्र नवरात्रि की सप्तमी (25 मार्च 2026) पर माँ कालरात्रि की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और महत्व जानें। अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और नकारात्मकता दूर करने के लिए इस दिन का विशेष फलदायी महत्व है।
मां कालरात्रि की पूजा का शुभ समय और महत्व
Auspicious Time and Significance of Worship
सप्तमी तिथि की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सर्वोत्तम माना गया है। 25 मार्च 2026 को उदया तिथि के अनुसार सुबह के इस पुण्य काल में माँ कालरात्रि की आराधना विशेष रूप से फलदायी होती है। इस समय वातावरण में सात्विकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो साधना को गहराई प्रदान करता है।
चैत्र नवरात्री में कैसे करें माँ कालरात्रि पूजा-जानें विधि
Step-by-Step Worship Method (Vidhi)
सप्तमी के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद निम्न विधि से पूजा करें-
- स्थापना-एक स्वच्छ चौकी पर माँ कालरात्रि की मूर्ति या चित्र विराजित करें।
- अर्पण-देवी को रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल) और लाल रंग के फूल अर्पित करें। लाल रंग इन्हें अत्यंत प्रिय है।
- ध्यान-तांबे या मिट्टी का दीपक जलाकर माँ का ध्यान करें और उनसे सुरक्षा की प्रार्थना करें।
चैत्र नवरात्री में मां कालरात्रि का विशेष भोग-माँ को प्रिय गुड़ करें अर्पित
Special Bhog- The Beloved Jaggery
माँ कालरात्रि को गुड़ अत्यंत प्रिय है। इस दिन उन्हें गुड़, गुड़ से बनी मिठाई या गुड़ की खीर का भोग अवश्य लगाएं। ऐसा करने से माता रानी शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करती हैं। भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
जप करना न भूलें माँ कालरात्रि का पवित्र मंत्र
Sacred Mantra of Maa Kalratri
पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से माँ कालरात्रि की कृपा प्राप्त होती है और वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है-
बीज मंत्र-“ॐ देवी कालरात्र्यै नमः”
ध्यान मंत्र-“या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः”
निष्कर्ष-पूजा के अंत में माँ कालरात्रि की आरती ‘कालरात्रि जय जय महाकाली’ का विधिवत गायन करें। आरती के पश्चात परिवार सहित देवी से क्षमा याचना करें। माँ कालरात्रि की साधना केवल बाहरी नकारात्मक शक्तियों का ही नाश नहीं करती, बल्कि भक्त के मन में स्थित भय, अज्ञान और अहंकार का भी संहार करती है। सप्तमी के दिन विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और अकाल मृत्यु जैसे गंभीर भय से सुरक्षा मिलती है। माँ कालरात्रि अपने भक्तों की हर परिस्थिति में रक्षा करती हैं और उन्हें निडरता का वरदान प्रदान करती हैं।

