Happy Birthday Usha Uthup: यूँ तो किसी भी गायिका की पतली बारीक सुरीली आवाज़ ही अक्सर पसंद की जाती है लेकिन एक गायिका ऐसी भी हैं जिनकी भारी आवाज़ कानों में पड़ते ही दिल में उतर जाती है और उनके चाहने वाले भी पूरी दुनिया में हैं क्योंकि वो एक नहीं बल्कि कई भाषाओं में गाने गाती हैं। अगर आप अंदाज़ा नहीं लगा पा रहे हैं तो ‘डार्लिंग’ बोलों से कोई गाना याद करने की कोशिश करिये बस आपको इन बोलों का दिलकश अंदाज़ याद आ जायेगा जो बड़ी सादगी, मगर जोशीले अंदाज़ के साथ (सात खून माफ़), फिल्म में पिरोया गया था अगर अभी भी आपको ये सिंगर न याद आ रहीं हों तो ‘एक दो तीन च चा’ (शालीमार) फिल्म का गाना ज़रा गाके देखिये, आपको पॉप और जैज़ म्यूज़िक में अपनी आवाज़ देने वाली ये सिंगर याद आ ही जाएंगी जो ये गाने हमारी संस्कृति का परिचय देते हुए गाती थीं। गोल चेहरे में बड़ी सी बिंदी, हार -बुँदे ,बालों में गजरा ,ऊँचा सा कद उसपे साड़ी और अक्सर पल्लू एक हाँथ में लपेटे बड़ी बेबाक स्टाइल में फुल कॉन्फिडेंस और उस पर दमदार आवाज़ में बड़े पक्के और सधे सुर यही उनकी पहचान हैं,आज से नहीं 70 के दशक से , जी हाँ ये हैं इंडिया की पॉप सिंगर उषा उत्थुप जिन्हें भारत सरकार ने (2011) में पद्मश्री और (2024) पद्मभूषण से सम्मानित किया और ‘डार्लिंग’ वो गीत है जिसके लिए फिल्मफेयर में आपने सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार जीता।
आवाज़ की ही वजह से हुईं शर्मिंदा :-
उषा जी की आवाज़ सबसे मुख्तलिफ़ है और उनका गाने का स्टाइल भी पर उन्हें इस फील्ड में आने के लिए ,अपनी जगह बनाने के लिए इसी आवाज़ और स्टाइल की वजह से बहोत मेहनत करनी पड़ी ,उन्हें साबित करना पड़ा कि वो अपनी इस आवाज़ में भी गाने गाकर सबका दिल जीत सकती हैं। 7 नवंबर 1947 को मुंबई में एक तमिल परिवार में , वैद्यनाथ सोमेश्वर सामी अय्यर के घर जन्मीं उषा को बचपन से म्यूज़िक में बहोत इंट्रेस्ट था इसलिए स्कूल में उन्होंने म्यूज़िक क्लास ज्वाइन की लेकिन उनकी भारी भरकम आवाज़ की वजह से उन्हें पहले ही क्लास से निकाल दिया गया फिर आख़िर में उनके एक टीचर ने उनकी लगन की क़द्र की और उन्हें इजाज़त दी। यूँ तो इससे पहले उषा जी ने कोई संगीत की तालीम नहीं ली थी लेकिन संगीत उनके आस पास था, वो उसी के साथ पली-बढ़ीं थीं। वो ऐसे कि उनके पैरेंट्स को म्यूज़िक में बहोत इंट्रेस्ट था और वो हर तरह का संगीत रेडियो पर सुनते थे कुछ ज़्यादा म्यूज़िक की समझ न होने के बावजूद भी, वो किशोरी अमोनकर और बड़े ग़ुलाम अली खान सहित पश्चिमी शास्त्रीय से लेकर हिंदुस्तानी और कर्नाटक तक सबकुछ सुनते थे और उषा भी उनके साथ मज़ा लेतीं, इन सात सुरों में समाए संगीत का जिसकी भाषा उनके लिए सिर्फ आनंद थी।
कैसे बन गईं केन्या की मानद नागरिक :-
1968 में, उन्होंने दो पॉप गानों, ” जंबालया ” और द किंग्स्टन ट्रायो के “ग्रीनबैक डॉलर” के कवर गाने ,अंग्रेजी में रिकॉर्ड किए, जो भारतीय बाज़ार में भी खूब बिके। इस शुरुआती दौर में उन्होंने कुछ समय लंदन में भी बिताया। बीबीसी रेडियो लंदन के लंदन साउंड्स ईस्टर्न में उनका इंटरव्यू लिया गया और कुछ राष्ट्रवादी गीतों ने उन्हें जल्द ही वहाँ लोकप्रिय बना दिया ,इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जोमो केन्याटा ने उन्हें केन्या का मानद नागरिक बना दिया। इस उपलब्धि के बाद उषा ने “मलाइका” या ‘एंजेल’ सांग ,फदिली विलियम्स के साथ गाया और बैंड फेलिनी फाइव के साथ “लाइव इन नैरोबी” नाम का रिकॉर्ड भी तैयार किया जिसे भी खूब पसंद किया गया।
शशि कपूर भी थे उनकी आवाज़ के दीवाने :-
उषा उत्थुप ने 1969 में चेन्नई में अपने संगीत करियर की शुरुआत ,माउंट रोड पर उस वक़्त के सफायर थिएटर के तहखाने में नाइन जेम्स नाम के एक छोटे से नाइट क्लब में गाना गाके की और वो भी साड़ी और लेग कैलीपर्स पहने हुए ये उनके लिए एक एक्स्पेरिमेंट था लेकिन उन्हें इतना अच्छा रिस्पॉन्स मिला कि नाइट क्लब के मालिक ने उन्हें एक हफ्ते तक रोज़ गाने के लिए कह दिया और इस हौसला अफ़ज़ाई के बाद आपने कलकत्ता में “ट्रिनकास”,”टॉक ऑफ द टाउन” जिसे अब “नॉट जस्ट जैज़ बाय द बे” कहते हैं , जैसे बड़े क्लबों में गाना शुरू किया। यहीं उनकी पहली बार मुलाक़ात हुई दिग्गज एक्टर शशि कपूर से जिन्होंने फिर उन्हें गाने के कई ऑफर दिए।
कैसे बनाई अपनी अलग स्टाइल :-
एक वक़्त पर ऊषा जी के पड़ोसी रहे ,पुलिस उपायुक्त एस. एमए पठान की बेटी जमीला ने उषा को थोड़ी बहोत हिंदी सिखाई और उनकी संगीत के प्रति लगन देखकर भारतीय शास्त्रीय संगीत को अपने अलग अंदाज़ में अपनाने के लिए भी कहा ये वही फ्यूजन था जिसे लेकर उन्होंने नया नज़रिया रखते हुए 1970 में भारतीय पॉप संगीत के अपने अनूठे स्टाइल के बारे में सोचा और अपने भावी पति, यानी जानी चाको उत्थुप से सगाई के बाद वो दिल्ली आ गईं जहाँ उन्हें मिली आइवरी-मर्चेंट की 1970 की फ़िल्म ‘बॉम्बे टॉकीज़’ जिससे आपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत करते हुए ,शंकर-जयकिशन के निर्देशन में एक अंग्रेज़ी गीत गाया और इसके बाद ही ” हरे रामा हरे कृष्णा” में टाइटल डांस ट्रेक और “दम मारो दम” गीत गाया हालाँकि, पहले ये गीत उन्हें पूरा गाना था लेकिन बाद में इसकी कुछ लाइनें ही आशा भोसले के साथ गाईं। आपने 1970 और 1980 के दशक में संगीत निर्देशकों आरडी बर्मन और बप्पी लाहिड़ी के लिए कई गाने गाए और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
अभिनय में भी हाँथ आज़माया :-
उषा उथुप गायिका ही नहीं अभिनेत्री भी हैं और उन्होंने 2006 में, मलयालम फिल्म ‘पोथन वावा ‘में कुरीसुवेटिल मरियम्मा का किरदार निभाया तो , फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा ‘में भी एक छोटी सी भूमिका निभाई और फिर 2007 में, अंजुन दत्त द्वारा निर्देशित ‘बो बैरक्स फॉरएवर’ में खुद की ही भूमिका निभाई यही रोल उन्होंने अदा किया ‘हैट्रिक ‘ म्यूज़िक वीडियो में , 2010 की तमिल फिल्म ‘मनमदन अम्बु ‘में भी उनकी एक छोटी सी भूमिका थी, विशाल भारद्वाज की फ़िल्म “सात खून माफ़” में भी नौकरानी की भूमिका अदा की थी और 2012 की कन्नड़ फ़िल्म ” परी” में भी आपने अदाकारी के जलवे बिखेरे हैं।
बच्चों के दिल के भी हैं क़रीब :–
उषा जी ने भारतीय बच्चों के लिए “कराडी राइम्स” गाईं ,ये कविताएँ सा-रे-गा-मा, आम, भारतीय नदियाँ, रेलगाड़ी के अनुभव, भारतीय त्योहार, देशी पेड़, क्रिकेट इसके अलावा भेलपुरी और सांभर जैसे भारतीय व्यंजनों, धोती, साड़ी, बिंदी और चूड़ियों जैसे परिधानों और यहाँ तक कि कुछ लोक कथाओं के ज़रिये भी भारतीय लोकाचार को दर्शाती हैं। इस तरह उन्होंने कविता को भारतीय राग में ढालकर और जोशीली तर्ज़ ,के साथ गाकर, बच्चों ही नहीं बड़ों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया। नाइट क्लबों में गाने के मामले में वो कहती हैं की उस वक़्त उन्हें सिर्फ गाने से मतलब था वो बस दुनिया के सामने अपनी आवाज़ पेश करना चाहती थीं।
आज भी हैं एक्टिव :-
उषा उत्थुप ने कुछ ऐसे सदाबहार गीत गाए जो आज भी संगीत प्रेमियों के लिए ख़ास हैं जैसे -‘डिस्को डांसर’ फिल्म में जिसके बोल थे -‘कोई यहाँ नाचे नाचे …’, ‘शालीमार’ में ‘वन टू च च चा. ..’ और ‘प्यारा दुश्मन’ में ‘ हरी ओम हरी…’ ‘शान’ से ‘दोस्तों से प्यार…’ और ‘नाकाबंदी’ फिल्म का शीर्षक गीत ‘नाकाबंदी ..’ जिनमें आपने अपनी शानदार और मुख़्तलिफ़ आवाज़ का जादू चलाया है। उन्होंने जानी चाको उत्थुप से शादी की थी ,जो अब वो हमारे बीच नहीं हैं 8 जुलाई 2024 को उनका निधन हो गया आप दोनों की एक बेटी अंजलि और बेटा सनी है। उषा कई सिंगिंग रियलिटी शो में बतौर जज भी नज़र आती रहती हैं ,स्टेज परफॉर्मर भी हैं और दुनिया भर में अपनी प्रस्तुतियाँ देती हैं। उनके लाइव कॉंसर्ट हर संगीत प्रेमी को झूमने पर मजबूर कर देते हैं। आपको राष्ट्रीय एकता में राजीव गांधी पुरस्कार, अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए महिला शिरोमणि पुरस्कार और उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए चैनल [वी] पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
