Supreme Court On SIR : देश की सबसे बड़ी अदालत में इन दिनों चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर माहौल काफी गरमाया हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों और अलग-अलग राज्यों में चल रही ‘एसआईआर’ प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई फिलहाल आगे के लिए टाल दी है। राहुल गांधी समेत 13 बड़े विपक्षी नेताओं की तरफ से यह याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिसमें मुख्य आरोप यह लगाया गया है कि आयोग के अहम फैसले सर्वसम्मति से नहीं बल्कि एकतरफा लिए जा रहे हैं। अदालत ने अब इस मामले में याचिकाकर्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दस दिनों का समय दिया है।
सुनवाई टलने की मुख्य वजह | Supreme Court On SIR
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने यह मामला सुनवाई के लिए आया था। सुनवाई आगे बढ़ाने का यह फैसला तब लिया गया जब मुख्य याचिकाकर्ता राकेश सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अदालत से चुनाव आयोग के जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए और वक्त मांगा। आपको बता दें कि चुनाव आयोग का यह विस्तृत जवाब कल रात ही अदालत में दाखिल किया गया था, जिसे पढ़ने और समझने के लिए याचिकाकर्ताओं को समय की आवश्यकता थी। अदालत ने उनकी इस मांग को जायز मानते हुए सुनवाई की अगली तारीख 17 नवंबर मुकर्रर कर दी है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग का कड़ा रुख
मंगलवार को होने वाली इस अहम सुनवाई से ठीक पहले चुनाव आयोग ने अदालत में एक बेहद कड़ा हलफनामा पेश किया था। आयोग ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गए सभी सवाल पूरी तरह से निराधार हैं और केवल अखबारों की रिपोर्टों पर आधारित हैं। आयोग ने यह भी साफ किया कि कोई भी फैसला एकतरफा नहीं लिया गया है, बल्कि संस्था के तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर आपसी सहमति से सभी निर्णय लिए हैं। आयोग के इस रुख से विपक्ष के उन तमाम तेवरों को झटका लगा है जिसके जरिए वे संस्था की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल खड़े कर रहे थे।
नई याचिका और आगे की कानूनी लड़ाई | Supreme Court On SIR
इस पूरे घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस की नेता डोला सेन ने भी इस मामले में एक नई याचिका दायर की है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अन्य सभी पुरानी याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता दस दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करें, जबकि यदि चुनाव आयोग कोई अतिरिक्त हलफनामा लाना चाहता है तो उसे चौदह दिनों का समय दिया गया है। आने वाले दिनों में यह कानूनी लड़ाई और अधिक दिलचस्प होने वाली है, क्योंकि एक तरफ जहां विपक्ष आयोग के फैसलों को घेरने की पूरी कोशिश कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग भी कानूनी मोर्चे पर हर आरोप का कड़ा जवाब दे रहा है।

