माघ महीने में संगम स्नान का ऐसा है बड़ा महत्वं, 75 साल बाद महामाघ का दुर्लभ संयोग, सीएम योगी ने किया स्नान

माघ स्पेशल। सनातन धर्म में माघ मास को बहुत ही पुण्यदायी माना गया है, 75 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जिसकी वजह से इसे साधारण माघ नहीं, बल्कि ‘महामाघ मेला’ कहा जा रहा है, जो इसे ऐतिहासिक बना रहा है. शास्त्रों के अनुसार माघ महीने में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में किया गया स्नान मोक्षदायी फल देता है।

100 यज्ञों के बराबर मिलता पुण्य

माघ महीने में संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन स्थल, मुख्य रूप से प्रयागराज) में स्नान करने का महत्व इस लिए भी है, क्योंकि यह सभी पापों का नाश करता है, जन्म-जन्मांतर के कष्ट दूर करता है, और आध्यात्मिक शुद्धि व मोक्ष की प्राप्ति कराता है, जिससे 100 यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है और यह तप, संयम व आत्म-शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। शास्त्र के ज्ञाता बताते है कि माघ मास में हर दिन प्रयाग संगम पर नहाने से सुख, सौभाग्य, धन और संतान प्राप्ति होती है और मृत्यु के बाद मोक्ष भी मिल जाता है. भगवान विष्णु का धाम मिलता है. पूरे माघ महीने में प्रयागराज के संगम में नहाने से कई यज्ञों को करने जितना पुण्य भी मिलता है।

सीएम योगी ने किया स्नान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी माघ मेला पहुंचे और संगम स्नान किया। गंगा पूजन के बाद सीएम योगी लेटे हनुमानजी मंदिर पहुंचे. वहां विधिवत दर्शन-पूजन किये। इसके बाद सीएम ने मेला व्यवस्था को लेकर समीक्षा बैठक करके अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए है। माघ मेला 3 जनवरी से शुरू हो चुका है और 15 फरवरी यानी महाशिवरात्रि तक चलेगा।

माघ मेला 2026 की प्रमुख स्नान तिथियां

3 जनवरी 2026 – पौष पूर्णिमा (मेला आरंभ)
14 जनवरी 2026 – मकर संक्रांति
18 जनवरी 2026 – मौनी अमावस्या
23 जनवरी 2026 – वसंत पंचमी
1 फरवरी 2026 – माघी पूर्णिमा
15 फरवरी 2026 – महाशिवरात्रि (मेला समापन)

महत्व के मुख्य बिंदु

पाप मुक्ति- मान्यता है कि इस दौरान संगम में स्नान करने से सभी पुराने पाप धुल जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
अतुलनीय पुण्य- शास्त्रों के अनुसार, माघ मास में संगम स्नान से 100 अश्वमेध और 1000 राजसूय यज्ञों जितना फल प्राप्त होता है.
आत्म-शुद्धि और मोक्ष- यह स्नान मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है, जिससे व्यक्ति माया के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ता है.
तप और संयम- कड़ाके की ठंड में संगम में डुबकी लगाना, तपस्या और आत्म-संयम का प्रतीक है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा देता है.
देवताओं का वास- माना जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु स्वयं गंगाजल में निवास करते हैं, जिससे स्नान का महत्व और बढ़ जाता है.
वैज्ञानिक कारण- वैज्ञानिक रूप से भी इस दौरान गंगा जल में विशेष खनिज और औषधीय गुण होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और त्वचा रोगों में लाभकारी होते हैं.

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