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रीवा लोकायुक्त पुलिस ने सीधी के जिला अभियोजन अधिकारी को 10 हजार की रिश्वत लेते किया गिरफ्तार

The Rewa Lokayukta police arrested the District Prosecution Officer of Sidhi while he was accepting a bribe.The Rewa Lokayukta police arrested the District Prosecution Officer of Sidhi while he was accepting a bribe.

The Rewa Lokayukta police arrested the District Prosecution Officer of Sidhi while he was accepting a bribe.

सीधी/रीवा। भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रीवा लोकायुक्त पुलिस ने सोमवार को एक और बड़ी सफलता हासिल की है। लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में कार्रवाई करते हुए टीम ने सीधी जिले के जिला अभियोजन अधिकारी (डीपीओ) राजकुमार रावत को 10 हजार रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह पूरी कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा के नेतृत्व में जिला न्यायालय परिसर के सामने स्थित पार्किंग क्षेत्र में अंजाम दी गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।

मामले की जानकारी देते हुए लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि सीधी जिले के ग्राम टेकर निवासी शिकायतकर्ता पंकज कुमार तिवारी (36 वर्ष) ने बीते 9 जुलाई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उसके एक कानूनी प्रकरण में कोर्ट में अभिमत (ओपिनियन) देने के एवज में जिला अभियोजन अधिकारी राजकुमार रावत द्वारा 20,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। सत्यापन के दौरान ही आरोपी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से पहली किस्त के रूप में 8,000 रुपये ले लिए थे और बाकी के 10,000 रुपये के लिए दबाव बना रहा था।

सोमवार को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार और निरीक्षक एस. राम मरावी के नेतृत्व में एक विशेष ट्रैप टीम का गठन कर सीधी भेजा गया। जैसे ही शिकायतकर्ता पंकज तिवारी ने जिला न्यायालय परिसर के सामने पार्किंग एरिया में आरोपी जिला अभियोजन अधिकारी राजकुमार रावत को 10,000 रुपये की केमिकल युक्त राशि सौंपी, वैसे ही मुस्तैद लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कागजी कार्रवाई की जा रही है।

इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि शिकायतकर्ता पंकज कुमार तिवारी ने इससे पहले भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने 7 जुलाई 2023 को मझौली थाने में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत एक आवेदन लगाया था। उस दौरान चाही गई जानकारी उपलब्ध कराने के एवज में सहायक उपनिरीक्षक (ASI) कमलेश त्रिपाठी ने उनसे 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। पंकज की शिकायत पर ही लोकायुक्त टीम ने 30 अगस्त 2025 को उक्त एएसआई को 20,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था, जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला वर्तमान में विवेचनाधीन है।

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