रीवा। कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी के जनसुनवाई में इस बार एक हजार आवेदक अपनी शिकायत लेकर पहुचें है। आवेदकों की बेतहास भीड़ के बीच कलेक्टर जनसुनवाई कक्ष को छोड़कर लाइन में खड़े आवेदकों के पास पैदल चलकर खुद पहुचे और एक-एक आवेदन पत्रों पर सुनवाई किए है। जिससे आवेदकों में उत्साह जाग गया और लोगों ने अपनी समस्या को कलेक्टर के पास खुलकर रखे है। नवागत कलेक्टर के आने के बाद जनसुनवाई की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। तपती गर्मी के बाद भी जिले भर से हजारों की संख्या में आवेदक कलेक्टर की दरवार में पहुच रहे है, तो कलेक्टर श्री सूर्यवंशी आखिरी आवेदक तक के आवेदन पत्रों पर सुनवाई कर रहे है। जिसके चलते तय समय दोपहर एक बजे के बाद भी जनसुनवाई जारी रही और रीवा में तकरीबन 3 बजे तक जनसुनवाई की गई।
रीवा में जमीन के पट्टे के लिए भटक रहा दिव्यांग, पहुंचा कलेक्टर के पास
रीवा जिले के गुढ़ क्षेत्र के उमरिहा गांव निवासी राजीव लोचन तिवारी ने मंगलवार को जनवासुनवाई में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी दर्दभरी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि वे अपनी 12 बीघा जमीन पर पिछले 20 वर्षों से रह रहे हैं। घर बनाने के लिए पांच-छह ट्रैक्टर मिट्टी भरवाई और मड़ई बनाकर परिवार के साथ रह रहे हैं। लेकिन कुशवाहा समाज के कुछ लोगों द्वारा लगातार मार-पीट, गाली-गलौज और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। पट्टे के लिए तहसील जाने पर कर्मचारियों ने उनके कागजात फाड़ दिए। अब दिव्यांग राजीव लोचन ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई। कलेक्टर ने आवेदन लेकर उनकी बात ध्यान से सुनी, और शीघ्र पट्टा देने का आश्वासन दिया। 45 किलोमीटर पैदल-बस यात्रा कर आए इस दिव्यांग ने कलेक्टर की संवेदनशीलता की प्रशंसा की।
100 जनसुनवाई में भी नहीं निकला हल, युवक ने केक काटकर जताया विरोध
मंगलवार को रीवा कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान एक अलग दृश्य देखने को मिला। जहाँ जवा क्षेत्र के ग्राम गढ़ा गांव से कलेक्ट्रेट पहुंचे युवक ने निराकरण न होने के कारण केक काटा। युवक का आरोप है कि वह साल 2022 से अभी तक 100 बार जनसुनवाई में पहुंचा लेकिन अभी तक उसकी समस्या का हल नहीं निकल पाया। युवक धनेश सोनकर ने बताया कि उसके गांव में सड़क और पुल निर्माण के लिए 2 करोड़ 51 लाख रुपए मंजूर हुए थे. लेकिन बाद में ठेकेदार द्वारा 500 मीटर की सड़क बनवाई गई और उसमें मिट्टी डालकर आगे का काम बंद कर दिया गया. युवक का आरोप है कि सड़क बनवाने के नाम पर उसका घर गिरवा दिया गया. धनेश ने ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि सड़क निर्माण में 1 करोड़ 20 लाख का घोटाला भी किया गया है. उसने बताया कि रोड न बनने के कारण बारिश के मौसम में पैदल चलने में दिक्कत होती है. गांव में वाहन नहीं पहुँच पाते। यहां तक कि खराब सड़क के चलते समय पर एंबुलेंस नहीं आने के कारण गर्भवती महिला की मौत भी हो चुकी है।

