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रंगपंचमी पर्व पर रंगों में नहाया राजवाड़ा, 200 वर्षो से चली आ रही इंदौर की गैर परंपरा

इंदौर। मंध्यप्रदेश के इंदौर में रविवार को रंगपंचमी पर्व उत्सव की छठा देखते ही बनी। टोरी कॉर्नर से रंगों के उत्सव की शुरुआत हुई। जिसमें टैंकरों पर मिसाइलें लगाकर रंग बरसाया जा रहा है। वहीं, नगर निगम की गेर में हाथी की प्रतिकृति की सूंड से रंगीन पानी की बौछार की जा रही है। अलग-अलग रंगों का गुलाल उड़ने से आकाश रंगीन हो गया है।

संस्कृतिक कार्यक्रम की धूम

इस रंग उत्सव में बरसाना की टीम लट्ठमार होली खेल रही है। इसमें राधा-कृष्ण की जोड़ी रासरंग करती शामिल है। युवाओं की टोली देशभक्ति के गीतों पर झूमती हुई चल रही है। मॉरल क्लब समिति की गेर में 15 ब्लोअर मशीनें, 6 डीजे गाड़ियां, एक बड़ी बोरिंग मशीन और 6 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां शामिल हैं।

होलकर काल से चली आ रही गैर परंपरा

इंदौर की गैर रंगपंचमी पर राजवाड़ा क्षेत्र में निकलने वाली लगभग 200 साल पुरानी ऐतिहासिक और अनोखी रंग यात्रा है, जो होलकर काल से चली आ रही है। इसमें गुलाल की तोपें, फूलों की बारिश, और टैंकरों से रंग उड़ाए जाते हैं, जिसमें लाखों लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होते हैं। यह उत्सव यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल होने की कगार पर है। यह आयोजन इंदौर की सामाजिक एकजुटता और जीवंत संस्कृति का सबसे बड़ा प्रतीक है।

इंदौर की गैर परंपरा

इतिहास- यह परंपरा होलकर वंश के शासनकाल से चली आ रही है, जो अब शहर की पहचान बन चुकी है।
आयोजन का स्वरूप- रंगपंचमी (होली के 5 दिन बाद) पर सुबह शहर के विभिन्न हिस्सों से रंगीन और संगीतपूर्ण गैरें (यात्राएं) निकलकर मुख्य शहर राजवाड़ा पर इकट्ठा होती हैं।
रंगों की बौछार- इसमें बड़ी-बड़ी तोपों, फाग यात्राओं, और पानी के टैंकरों के जरिए लाखों लोगों पर रंग और गुलाल बरसाया जाता है, जो पूरी तरह से निःशुल्क होता है।
सांस्कृतिक एकता- इस उत्सव में जात-पात से ऊपर उठकर, छोटे-बड़े, सभी उम्र के लोग एक साथ मिलकर होली खेलते हैं।
यूनेस्को की नजर- इस ऐतिहासिक रंगपंचमी गैर को यूनेस्को की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।

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