Mutual Funds के दौर में बचत की बदल रही पिक्चर! MF में 6℅ इंवेस्टर्स हुए शामिल

Mutual Funds: भारत देश भी विकास की दृष्टि से अपने पैर फैला रहा है, ऐसे में लोग अब अपनी बचत का बड़ा हिस्सा MF में लगा रहे हैं. जी हां यह जानकारी RBI के कुछ एक्सपर्ट द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आई है. वित्त वर्ष 2023 में Mutual Funds का हिस्सा घरेलू बचत का 6% तक पहुंच गया, जबकि 2012 में यह 1% से भी कम था. मतलब, अब ज्यादा लोग बैंक में पैसे जमा करने के बजाय स्टॉक मार्केट में निवेश करना पसंद करने लगे हैं.

RBI ने किया खुलासा

RBI के एक आर्टिकल में कहा गया है कि पहले लोग फाइनेंशियल मार्केट्स को लेकर थोड़ा डरते थे, लेकिन अब वे जोखिम लेना सीख रहे हैं. MF ने इंवेस्टर्स को इस नई दिशा में कदम बढ़ाने में मदद की है. इस बदलाव के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं- ज्यादा लोग डीमैट अकाउंट खोल रहे हैं, बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट की दरें कम हैं और कारोबार का माहौल बेहतर हो रहा है.

पिछले 10 सालों में काफी बढ़ा है म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का दायरा

RBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, Mutual Funds इंडस्ट्री का दायरा पिछले 10 सालों में काफी बढ़ा है. मार्च 2014 में MF में लोगों का निवेश कुल बैंक डिपॉजिट्स के मुकाबले सिर्फ 10% था, लेकिन मार्च 2024 तक यह बढ़कर करीब 24% हो गया है. यानी अब लोग पहले से कहीं ज्यादा म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर रहे हैं. म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) मार्च 2010 में ₹6.1 लाख करोड़ था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर ₹65.7 लाख करोड़ पहुंच गई है. इसका मतलब है कि इस दौरान हर साल औसतन 17% से ज्यादा की रफ्तार से यह सेक्टर बढ़ा है.

RBI गवर्नर ने क्या कहा

इस महीने की शुरुआत में RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अब लोग Share Market और Mutual Funds जैसे ऑप्शनों को अपनाकर देश की आर्थिक तरक्की में हिस्सा ले रहे हैं. उन्होंने इसे एक ‘स्वस्थ’ और अच्छा बदलाव बताया, क्योंकि लोग अब केवल बैंक में पैसे रखने के बजाय नए इन्वेस्टमेंट ऑप्शनों को आजमा रहे हैं.

MF में अभी भी है बड़ी संभावनाएं

RBI गवर्नर संजय ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है और लोग अब अपनी बचत को अलग-अलग जगह निवेश करना सीख रहे हैं. ये बदलाव दिखाता है कि देश एक बेहतर और संतुलित निवेश की दिशा में बढ़ रहा है. RBI के कर्मचारियों द्वारा लिखे एक ऑर्टिकल में कहा गया है कि हाल के सालों में भले ही MFs तेजी से बढ़े हैं, लेकिन अभी भी इनके पास काफी बड़ा मौका है. अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी उनकी GDP के मुकाबले भारत से कहीं ज्यादा है. एक्सपर्ट का मानना है कि अब जब आम लोग भी निवेश की दुनिया में कदम रख रहे हैं, तो उन्हें सही जानकारी देना और उनकी सुरक्षा करना बहुत जरूरी है, ताकि उनका भरोसा बना रहे और वे सोच-समझकर निवेश कर सकें.

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