Death Anniversary Of Bappi Lahiri : 1981 में रुपहले पर्दे पर जगमगाई ‘ज्योति’ फिल्म का गीत ‘थोड़ा रेशम लगता है. …’ ऐसा गाना है जिसकी चमक आज तक बरक़रार है और गाहे बगाहे वो यंग जनरेशन के बीच भी धूम मचाता रहता है क्योंकि इसका तड़कता भड़कता संगीत हर किसी को अपनी और आकर्षित कर लेता है ,और भी ऐसे कई गीत हैं जिनका जादू नई पीढ़ी पर असर दिखाता है ,वो इन गानों को ओल्ड नहीं कह पाते और ये शानदार संगीत बनाया बॉलीवुड का तार्रुफ़ रॉक और डिस्को से कराने वाले बप्पी लाहिड़ी जी ने जिनकी धुनों ने संगीत प्रेमियों को थिरकने पर मजबूर कर दिया तो वहीं उनकी आवाज़ और अंदाज़ ने सबको दीवाना बना दिया और जब वो रूबरू आए तो लोग उन्हें देखते ही रह गए वो इसलिए कि न केवल उनका संगीत दुनिया से मुख्तलिफ था बल्कि वो खुद भी सबसे जुदा अंदाज़ में नज़र आते थे ,उनके बड़े -बड़े बाल ,मखमली कार्डिगन , धूप के चश्मे और उसपे सोने से सजा उनका भरा बदन, उसपे भी ग़ज़ब ढाती थी चेहरे पे बच्चों जैसी मासूम मुस्कुराहट। सोने से उनकी मोहब्बत कितनी थी इस बात का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उनसे ज़्यादा सोना उनकी पत्नी चित्रानी जी के पास था।
माता -पिता से मिली संगीत की धरोहर :-
बप्पी दा का असली नाम था आलोकेश अपारेश लाहिड़ी ,वो 27 नवंबर 1952 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में पैदा हुए थे और उनके माता-पिता, अपारेश और बंसुरी लाहिड़ी, दोनों बंगाली गायक ,शास्त्रीय संगीत और श्याम संगीत के संगीतकार भी थे। वे मोहनपुर , सिराजगंज (वर्तमान बांग्लादेश में) के बंगाली ब्राह्मण लाहिड़ी-मोहन परिवार से थे। 1947 में बंगाल के विभाजन के बाद उनका परिवार पश्चिम बंगाल में आकर बस गया था। बप्पी दा के पैरेंट्स की एक ख़ास बात भी आपको बताते चलें कि उनकी पहली मुलाक़ात बतौर आर्टिस्ट ऑल इंडिया रेडियो के लिए प्रोग्राम पेश करते हुए हुई थी इसके बाद दोनों में प्यार हो गया और फिर उन्होंने लव मैरिज कर ली ,बप्पी दा उनकी इकलौती संतान थे। ये भी बता दें कि गायक किशोर कुमार उनके मामा लगते थे उन्होंने ही बप्पी दा को संगीत सिखाने के साथ -साथ बॉलीवुड में पैर जमाने में मदद की थी।
लता मंगेशकर ने की तारीफ़ :-
संगीतकारों के परिवार में जन्में बप्पी लाहिड़ी ने महज़ 3 साल की उम्र में तबला बजाना शुरू किया था और ऐसा जौहर दिखाया कि लता मंगेशकर भी उनसे प्रभावित हो गईं, आपने उन्हीं की सलाह पर समता प्रसाद से संगीत की तालीम हासिल की थी जवानी की दहलीज़ पर पहुँचे तो महज़ 18 -19 साल की उम्र में कोलकाता छोड़ कर मुंबई आ गए और संगीत को साधते हुए साल 1973 को ,उन्हें पहली बार हिंदी फिल्म ‘नन्हा शिकारी’ में संगीत देने का मौका मिला जिसमें मुकेश का गाया गीत ‘तू ही मेरा चंदा…’ को बेहद पसंद किया गया फिर 1974 की बंगाली फिल्म ‘दादू’ में आपके गानें लता मंगेशकर ने गाए ,बतौर गायक पहली बार उन्होंने बंगाली फिल्म में गाना गया था पर पहचान बनाई साल 1975 में फिल्म ‘ज़ख्मी’ से जिसमें उन्होंने मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के साथ “नथिंग इज़ इम्पॉसिबल” गीत भी गाया था।
सोना पहनने के पीछे की वजह :-
बप्पी दा के इतना सोना पहनने के पीछे भी एक वजह थी दरअसल वो बचपन से ही अमेरिकी संगीतकार एल्विस प्रेस्ली को अपना आदर्श मानते थे और उन्हीं से प्रेरित होकर वो एक दो नहीं बल्कि कई सोने की चेन और गहने पहनने लगे थे फिर अपने इस सिग्नेचर लुक के साथ किये गए प्रोग्राम्स में कामियाबी हासिल करने के बाद गोल्ड को अपने लिए बहोत लकी भी मानने लगे थे।
ऊ ला ला ,ऊ लाला..गाकर आये फिर सुर्ख़ियों में :-
फिल्म म्यूज़िक में पॉप का मिक्चर करने का श्रेय बप्पी दा को ही जाता है उन्होंने बॉलीवुड में 70 के दशक में एंट्री की और रॉक और डिस्को का तड़का लिए उनका जादू 80 के दशक तक सबके सर चढ़कर बोला जिनमें ‘बंबई से आया मेरा दोस्त…, आई एम ए डिस्को डांसर…, ज़ूबी-ज़ूबी…, याद आ रहा है तेरा प्यार…, यार बिना चैन कहाँ रे. .., तम्मा तम्मा लोगे…, जैसे मशहूर गाने आए उनके संगीतबद्ध किए गए ज़्यादातर गीतों को किशोर कुमार और विजय बेनेडिक्ट ने आवाज़ दी बप्पी दा की पसंदीदा आवाज़ की बात करें तो उन्होंनें ऊषा उत्थप और अलीषा चिनॉय की आवाजों को खूब पसंद किया। 90 के दशक में बप्पी दा के संगीत से कुछ मिलती जुलती धुनों के आ जाने से उनका काम थोड़ा कम दिखा लेकिन जब बप्पी दा ने, ‘ऊ ला ला ऊ लाला.. ‘ की पुकार लगाई तो उनके चाहने वाले फिर दौड़े चले आए 2011 में रिलीज़ फिल्म ‘ द डर्टी पिक्चर’ को देखने और उनका गाना सुनने।
जितेंद्र के साथ बन गया रिकॉर्ड :-
हिंदी गानों के साथ साथ बप्पी दा के तेलुगु और बंगाली फिल्मों के गाने भी काफी लोकप्रिय हुए उन्होंने सुलक्षणा पंडित के साथ ‘जाना कहाँ है. ..’ युगल गीत गाया जिस ने उन्हें बतौर गायक पहचान दिलाई। फिल्म ‘हिम्मतवाला’ की सफलता के बाद, बप्पी ने ‘जस्टिस चौधरी’, ‘जानी दोस्त’, ‘मवाली’, ‘हैसियत’, ‘तोहफा’, ‘बलिदान’, ‘कैदी’, ‘होशियार’, ‘सिंहासन’, ‘सुहागन’, ‘मजाल’, ‘तमाशा’, ‘सोने पे सुहागा’ और ‘धर्म अधिकारी’ जैसी जितेंद्र अभिनीत फिल्मों के लिए संगीत दिया जिनमें 12 सुपर-हिट सिल्वर जुबली रहीं और ये एक रिकॉर्ड बन गया।
ख़ास पहचान मिली :-
बप्पी लाहिड़ी के संगीत निर्देशन में ‘ज़ख़्मी’ फिल्म के सभी गीत खूब मशहूर हुए जैसे – ‘जलता है जिया मेरा …’ किशोर आशा के युगल स्वर में और लता मंगेशकर की आवाज़ में -‘अभी अभी थी दुश्मनी….’और ‘आओ तुम्हें चांद…’ इसी तरह की रिकॉर्ड तोड़ सफलता से ‘फिर जनम लेंगे हम ‘फिल्म में ‘जनम जनम ना साथी …’ और शीर्षक गीत ने धूम मचाई और फिर फिल्म ‘चलते-चलते’ के सभी गाने हिट हुए, आपके संगीत निर्देशन में आई कुछ और फिल्मों का ज़िक्र करें तो एक अलग छाप छोड़ती हैं ,फिल्में -‘नया क़दम’ , ‘मास्टरजी’ , ‘आज का एमएलए’ ‘राम अवतार’, ‘बेवफाई’ , ‘मकसद’ , ‘सुराग’ , ‘इंसाफ मैं करूंगा’ ,’अधिकार’, ‘आप की खातिर’ , ‘दिल से मिले दिल’ , 1980 की ‘पतिता’ , ‘लहू के दो रंग’ ,नमक हलाल , शराबी . ‘हत्या’ और ‘सुरक्षा ‘ जिनसे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगीत निर्देशक के रूप में पहचान मिली।
ग़ज़लों का दिलनशीं संगीत :-
रॉक और डिस्को से हटकर बप्पी लाहिड़ी ने कुछ फिल्मीं ग़ज़लों के लिए भी दिलनशीं धुनें बनाईं जिसमें फ़िल्म ‘ऐतबार’ की ग़ज़ल “किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है. ..” एक ख़ास मक़ाम रखती है। उन्होंने 1986 में 33 फिल्मों के लिए 180 से ज़्यादा गाने रिकॉर्ड करके गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में प्रवेश किया। आप हम ही नहीं उनके संगीत के किंग ऑफ पॉप माइकल जैक्सन भी दीवाने थे और उन्होंने बप्पी दा को मुंबई में हुए अपने पहले शो में भी बुलाया था।
लाइफटाइम अचीवमेंट हासिल किया :-
बप्पी दा को 2012 में ग्रैमी पुरस्कारों में जूरी सदस्य के रूप में चुना गया था। 2016 में, उन्होंने डिज़्नी की एनिमेटेड फैंटेसी एडवेंचर फिल्म ‘मोआना ‘के हिंदी डब संस्करण में तमातोआ के किरदार को आवाज़ दी तो वहीं “शाइनी” के हिंदी संस्करण “शोना” को संगीत दिया और गाने भी गाए। ये किसी एनिमेटेड किरदार के लिए उनकी पहली डबिंग थी, और ‘वे रामरतन’ के गीत “ये है डांस बार” में नज़र भी आए। उन्हें 63वें फिल्मफेयर पुरस्कारों में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला ।
2021 में, वो ,सा रे गा मा पा और इंडियन आइडल जैसे संगीतमय टीवी शोज़ में भी बतौर जज दिखे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी होने के नाते ,बप्पी दा ने ‘जस्टिस फॉर विडोज’ नाम के स्वयं सेवी संगठन से जुड़कर कई काम किये जिसके लिए उन्हें ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ सम्मान से भी नवाज़ा गया ,संगीत के अलावा उन्होंने राजनीति में क़दम रखते हुए 2014 में लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था। उनका ये सफर तब थम गया जब ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से जूझते हुए बप्पी लाहिड़ी ने 15 फरवरी 2022 को 69 साल की उम्र में मुंबई में आखरी साँस ली।

