चित्रकूट। लोगों की सेवा करते हुए ऑखों की रोशनी देने वाले पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. बीके जैन का शुक्रवार शाम निधन हो गया। उन्होंने चित्रकूट के जानकी कुंड चिकित्सालय में शाम साढ़े 4 बजे अंतिम सांस ली। समाज सेवी श्री जैन कुछ समय से बीमार चल रहे थें। उनका मुंबई में ईलाज भी चला, लेकिन स्वास्थ में सुधार न हो पाने के कारण वापस चित्रकूट लाया गया था। यहा डॉक्टरों की देखरेख में उनका ईलाज चल रहा था और अंततः उन्होने अंतिम सांसे ले लिए। उनके निधन की पुष्टि सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट परिवार ने की है।
50 सालों से ज्यादा दी सेवाएं
डॉ. बुधेंद्र कुमार जैन ने नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में 50 से अधिक वर्षों तक अपनी सेवाएं दिए। उनकी इस सेवा भाव को देखते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने 26 जनवरी 2025 में उन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया था। डॉ. जैन ने 1970 के दशक में चित्रकूट में अपनी सेवाएं शुरू कीं और नेत्र चिकित्सा को सुलभ और सस्ती बनाने के लिए, विशेषकर ग्रामीण और गरीब आबादी के लिए, एक मॉडल के रूप में काम किया।
सीमित संसाधनों के बाद भी नही कंम हुआ उत्साह
डॉ. बी.के. जैन सदगुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट के संस्थापक निदेशक और ट्रस्टी रहे। 1970 के दशक में उन्होंने चित्रकूट जैसे पिछड़े और आदिवासी अंचल में नेत्र चिकित्सा सेवा शुरू की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होने इस संस्थान को देश-दुनिया में पहचान दिलाई। आज यह चिकित्सालय भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के प्रमुख नेत्र चिकित्सा केंद्रों में गिना जाता है। सदगुरु नेत्र चिकित्सालय में हर वर्ष करीब 1.55 लाख से अधिक नेत्र ऑपरेशन किए जाते हैं और 17 लाख से ज्यादा मरीजों को नेत्र सेवाओं का लाभ मिलता है। डॉ. जैन के नेतृत्व में यहां दुनिया का सबसे बड़ा एवं नई तकनीक का ऑपरेशन थिएटर भी विकसित किया गया, जो कि ऑख के मरीजों के लिए सुविधा पहुचा रहा है।

