भोपाल। विधानसभा का बजट सत्र जारी है। जिसमें विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष प्रदेश के मुद्रदों को विंधानसभा में रखते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे है। 9वें दिन विधानसभा सदन में प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले के धिरौली स्थित अडानी के कोल ब्लॉक मामले को उठाते हुए न सिर्फ जांच की माग किए बल्कि सदन से वॉक ऑउट भी किए है। उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक के लिए आधा दर्जन से ज्यादा गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। सिंगरौली प्रशासन ने जो जानकारी दी है उसके तहत 12,998 परिवार इसमें प्रभावित हैं।
कांग्रेस ने मुआवजा वितरण में गड़बड़ी का लगाया आरोप
कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुआवजा राशि बाहरी लोगों को भी दी गई है। ऐसे में कांग्रेस विधायक जांच के लिए विधानसभा समिति गठित करने की मांग पर अड़े रहे। अध्यक्ष के आश्वासन के बावजूद कांग्रेस विधायक संतुष्ट नहीं हुए और विरोध जारी रखा। इस बीच सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई।
इस लिए है विरोध
सिंगरौली (मध्य प्रदेश) में कोल ब्लॉक के लिए जमीन आवंटन का मुख्य विरोध आदिवासियों और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है। इसका कारण उनकी पारंपरिक संस्कृति, आजीविका (खेती), और पर्यावरण पर खतरा है। ग्रामीण इसे अपनी जमीन, जंगलों और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ मान रहे हैं, जो बाहरी शोषण से उनकी सुरक्षा को खतरे में डालता है।
विरोध के मुख्य कारण
विस्थापन और आजीविका की हानि- कोयला खनन के लिए जमीन अधिग्रहण से स्थानीय आदिवासियों का विस्थापन हो रहा है, जिससे वे अपनी कृषि भूमि और जंगलों से वंचित हो रहे हैं।
संस्कृति और रीति-रिवाज को खतरा- विकास परियोजनाओं के कारण स्थानीय आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक भाषा और जीवन शैली पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
पर्यावरणीय प्रभाव- बड़े पैमाने पर होने वाले कोयला खनन से क्षेत्र की पारिस्थितिकी और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
अधिकारों का उल्लंघन- ग्रामीण अपनी पारंपरिक जमीनों की सुरक्षा और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि यह अधिग्रहण उनकी पहचान को नष्ट कर रहा है।

