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धार्मिक परंपराओं और श्रमिक आंदोलनों से छुट्टी की हुई थी शुरूआत, 1890 में मिला रविवार अवकाश

अवकाश। अवकाश हर किसी के लिए फीलगुड वाला होता है, हो भी क्यों न, काम-काज से हट कर अवकाश में बच्चों को खेलने और घूमने फिरने का मौका मिलता है तो बड़े फुर्सत से बातचीत करके अपने सप्ताह भर का लेखा-जोखा करते है। यही वजह रही है कि सप्ताहिक अवकाश की मांग सदियों पूर्व धार्मिक परंपराओं और श्रमिक आंदोलनों से हुई, जिसमें भारत में नारायण मेघाजी लोखंडे ने 1880 के दशक में साप्ताहिक अवकाश के लिए लड़ाई लड़ी, जिसके परिणामस्वरूप 1890 में ब्रिटिश सरकार ने रविवार को साप्ताहिक छुट्टी के रूप में मान्यता दी, जिसे बाद में विश्वभर में अपनाया गया। दरअसल काम और जीवन के बीच संतुलन के लिए आराम ज़रूरी है, जैसे प्राचीन रोम और ईसाई परंपरा में भी अवकाश के दिन होते थे और 20वीं सदी में हेनरी फोर्ड ने इसे और बढ़ावा दिया।

भारत में अवकाश की शुरुआत

ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय मजदूर सप्ताह के सातों दिन काम करते थे और उन्हें आराम नहीं मिलता था, जिससे उनकी स्थिति खराब थी। इसको देखते हुए भारत के पहले श्रमिक नेता, नारायण मेघाजी लोखंडे ने मजदूरों के अधिकारों के लिए आंदोलन चलाया और रविवार को साप्ताहिक अवकाश की मांग की। अवकाश की यह लड़ाई 7 साल के संघर्ष के बाद, 10 जून 1890 को ब्रिटिश सरकार ने रविवार को सभी के लिए साप्ताहिक अवकाश घोषित किया, जिससे यह भारतीय श्रमिकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बनी।

विश्व स्तर पर अवकाश की शुरुआत

प्राचीन काल रोमन सम्राट कॉन्स्टेंटाइन ने 321 ईस्वी में ईसाई परंपरा के आधार पर रविवार को आधिकारिक अवकाश घोषित किया था, जबकि प्राचीन सभ्यताओं में भी शीतकालीन संक्रांति के उत्सव होते थे। 20वीं सदी में, अमेरिकी उद्योगपति हेनरी फोर्ड ने 1926 में अपनी कंपनी में शनिवार और रविवार की छुट्टी (दो दिन की छुट्टी) लागू की, यह तर्क देते हुए कि थका हुआ मजदूर अच्छा काम नहीं कर सकता और यह प्रथा बाद में वैश्विक हो गई, दरअसल अवकाश की अवधारणा धार्मिक आस्थाओं और श्रम अधिकारों की मांगों का परिणाम है, जिसने काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाने में मदद की है।

अवकाश का अर्थ

अवकाश या फुरसत (स्मपेनतम या तिमम जपउम) उस समयावधि को कहते हैं जो व्यवसाय, कार्य, शिक्षा आदि से हटकर व्यतीत की जाती है। खाना-पीना, सोना आदि आवश्यक कार्य भी अवकाश के अन्तर्गत नहीं आते। अवकाश या फुरसत उस समयावधि को कहते हैं जो व्यवसाय, कार्य, शिक्षा आदि से हटकर व्यतीत की जाती है। खाना-पीना, सोना आदि आवश्यक कार्य भी अवकाश के अन्तर्गत नहीं आते। सार्वजनिक पार्क शुरू में खेल, अवकाश और मनोरंजन आदि के लिये ही बनाये गये थे। अवकाश का अर्थ है छुट्टी का समय, खाली समय, काम के दबाव से मिलने वाली मीठी-मीठी आज़ादी । यह बड़ों के लिए खेल के समय जैसा है। अवकाश का अर्थ है काम या पढ़ाई जैसी प्रतिबद्धताओं से दूर रहने का समय।

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