The Concept of Social Service in Indian Philosophy : रीवा में विश्व एनजीओ दिवस पर विशेष व्याख्यान-रीवा, 27 फरवरी 2026: विश्व एनजीओ दिवस के अवसर पर शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा के समाजशास्त्र विभाग ने “भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में सामाजिक परिवर्तन में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका” विषय पर एक भव्य विशेष व्याख्यान एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। प्राचार्या डॉ. अर्पिता अवस्थी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्राचीन भारतीय सेवा भावना और आधुनिक सामाजिक संगठनों के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक करना एवं समाज सेवा के क्षेत्र में नवाचारी सोच विकसित करना रहा।टी.आर.एस. कॉलेज, रीवा में विश्व एनजीओ दिवस पर भारतीय ज्ञान परंपरा और सामाजिक परिवर्तन में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका पर विशेष व्याख्यान का आयोजन। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
आयोजन का शुभारंभ एवं अतिथि स्वागत
Inauguration & Welcome
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण से हुआ, जिसने ज्ञान, चेतना और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश दिया। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने वातावरण को आध्यात्मिक गरिमा से भर दिया। कार्यक्रम के संयोजक एवं समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश शुक्ल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की अवधारणा को रेखांकित किया।
भारतीय दर्शन में समाजसेवा की अवधारणा
The Concept of Social Service in Indian Philosophy
डॉ. अखिलेश शुक्ल ने अपने स्वागत उद्बोधन में भारतीय संस्कृति में निहित समाजसेवा की व्यापक परिभाषा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि समाज-सेवा भारत के लिए कोई नवीन अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारी सनातन जीवन-दृष्टि का अभिन्न अंग है। उन्होंने वेदों के मूल मंत्र “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” और भगवद्गीता में वर्णित “लोकसंग्रह” एवं “निष्काम कर्म” के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए बताया कि सामाजिक उत्तरदायित्व प्रत्येक नागरिक का धर्म है।
विश्व एनजीओ दिवस-वैश्विक पहचान और भारतीय मूल्य
World NGO Day-Global Identity and Indian Values
विश्व एनजीओ दिवस की स्थापना वर्ष 2010 में मानवतावादी चिंतक मार्सिस लिओर्स द्वारा की गई थी और 27 फरवरी 2014 को इसका प्रथम वैश्विक आयोजन फिनलैंड के हेलसिंकी में हुआ। डॉ. शुक्ल ने इस अवसर पर बताया कि यद्यपि यह दिवस आधुनिक काल में प्रारंभ हुआ, परंतु इसकी मूल भावना निःस्वार्थ सेवा और लोककल्याण हमारी संस्कृति में प्राचीन काल से निहित है।
मुख्य वक्ता का उद्बोधन-सामाजिक परिवर्तन में एनजीओ की भूमिका
Keynote Address-Role of NGOs in Social Change
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सतना के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद रस्तोगी ने अपने विस्तृत उद्बोधन में गैर-सरकारी संगठनों को आधुनिक समाज में परिवर्तन के सशक्त साधन के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका का ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत किया। डॉ. रस्तोगी ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन एक सतत प्रक्रिया है और केवल सरकारी नीतियाँ इसके लिए पर्याप्त नहीं हैं; नागरिक सहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में एनजीओ की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सामुदायिक सहभागिता को किसी भी एनजीओ की सफलता का आधार बताया। गीता के “कर्मण्येवाधिकारस्ते” सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ कर्म ही सामाजिक परिवर्तन की धुरी है।
आभार प्रदर्शन एवं कार्यक्रम संचालन
Vote of Thanks & Program Conduct
कार्यक्रम का सफल एवं कुशल संचालन डॉ. शाहिदा सिद्दीकी ने किया। अंत में डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में ‘कर्तव्यबोध’ और ‘सेवा-भाव’ का जागरण करते हैं। कार्यक्रम में डॉ. मुकेश शाह, डॉ. फरजाना बानो, डॉ. प्रियंका पांडे, डॉ. निशा सिंह, डॉ. प्रियंका तिवारी, डॉ. शिल्ली जैन, डॉ. नारायण द्विवेदी, डॉ. मंजुश्री मिश्रा, श्री योगेश निगम एवं श्री रत्नेश सहित अनेक प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष (Conclusion)-कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि सामाजिक परिवर्तन किसी एक संस्था का कार्य नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प का परिणाम है। भारतीय चिंतन के “वसुधैव कुटुम्बकम्” (विश्व एक परिवार है) और “लोकसंग्रह” (जन-कल्याण) के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। टी.आर.एस. महाविद्यालय का समाजशास्त्र विभाग इस प्रकार के ज्ञानवर्धक आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को संवेदनशील, जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक बनाने की दिशा में सतत प्रयासरत है। विश्व एनजीओ दिवस पर आयोजित यह विशेष व्याख्यान निश्चय ही सभी के लिए प्रेरणादायी और अविस्मरणीय सिद्ध हुआ।
