रीवा। रीवा के संजय गांधी चिकित्सालय (SGMH) से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी अस्पताल में सक्रिय ‘एंबुलेंस गिरोह’ के झांसे में आकर एक बुजुर्ग को अपनी जान गंवानी पड़ी। इलाज के नाम पर लाखों रुपये की ठगी और गलत इलाज का शिकार हुए बुजुर्ग ने गुरुवार को दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल परिसर में भोले-भाले मरीजों को गुमराह कर निजी अस्पतालों में मोटी दलाली पर भेजने वाला एक बड़ा नेक्सस काम कर रहा है।
सड़क हादसे के बाद रीवा लाया गया था मरीज
पूरा मामला मैहर जिले के ताला क्षेत्र का है। बीते 23 जून की सुबह टहलने निकले बुद्ध प्रकाश शर्मा को एक अनियंत्रित बाइक ने जोरदार टक्कर मार दी थी। इस सड़क हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। गंभीर हालत में परिजनों ने उन्हें इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया था। परिजनों को उम्मीद थी कि यहां उनका उचित इलाज हो सकेगा, लेकिन अस्पताल में कदम रखते ही वे दलालों के चंगुल में फंस गए।
बेहतर इलाज का झांसा देकर जबलपुर के निजी अस्पताल भेजा
परिजनों का गंभीर आरोप है कि संजय गांधी अस्पताल में तैनात एक एंबुलेंस चालक ने मरीज की नाजुक हालत का फायदा उठाया। उसने परिजनों को डराया और बेहतर व त्वरित इलाज का झांसा देकर उन्हें जबलपुर के एक निजी अस्पताल में ले जाने के लिए मजबूर कर दिया। डॉक्टरों और एंबुलेंस चालक के इस जाल में फंसकर परिजन मरीज को लेकर जबलपुर चले गए।
₹5 लाख खर्च, गलत इलाज और मौत
परिजनों का बड़ा दावा: “जबलपुर के उस निजी अस्पताल में हमसे पांच लाख रुपये ऐंठ लिए गए, लेकिन मरीज की स्थिति सुधरने की बजाय और बिगड़ती चली गई। वहां उनका गलत इलाज किया गया।”
जब बुजुर्ग की हालत अत्यंत नाजुक हो गई, तो मजबूरन परिजन उन्हें वापस रीवा के संजय गांधी अस्पताल लेकर आए। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी; गुरुवार को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। बुजुर्ग की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है और उन्होंने इस पूरे रैकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
इस सनसनीखेज घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर यह गिरोह रीवा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में खुलेआम घूम रहा है। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों के बयानों के आधार पर एंबुलेंस चालक और निजी अस्पताल की भूमिका की गहन जांच की जा रही है, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

