एमपी पोलटिक्ल न्यूज। आगामी वर्षो में होने वाले विधानसभा चुनावी रण को जीतने के लिए भाजपा ने काम करना शुरू कर दिया है। भाजपा सबसे पहले उन विधानसभा सीटों पर अपना फोकस कर रही है। जो कि कांग्रेस की गढ़ मानी जा रही है। ऐसी सीटों पर तकरीबन कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव जीत रहे है। भाजपा ऐसी सीटों पर अपनी सल्तनत कायम करने के लिए दिग्गजों को जिम्मेदारी दे रही है। जिससे वे क्षेत्र में तीन से चार क्लास्टर बनाकर जीत के लिए रणनीति तैयार कर सकें।
इस तरह से होगा काम
बीजेपी के राजनैतिक चाणक्य ऐसी सीटों पर हार के कारणों का अध्ययन करेगे और उन्हें दूर करने के लिए मजबूत रणनीति बनाएगें। ऐसी कई सीटों पर कांग्रेस अपने जिन दिग्गज नेताओं के प्रभाव के कारण मजबूत है, उनका किला भी भेदने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। मिशन-2028 के तहत एक बहुआयामी माइक्रो-प्लानिंग रणनीति बीजेपी तैयार कर रही है। जिसमें बूथ्र लेवल पर पार्टी काम करेगी, तो वही आदिवासी बहूल्य क्षेत्रों में पार्टी के लोग घर-घर जाकर पार्टी की रीति-नीति से लोगो को अवगत कराऐगे।
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की चुरहट विधानसभा
सीधी जिले की चुरहट सीट भी कांग्रेस का गढ़ रही है।पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की इस परंपरागत सीट पर वर्ष 1993 और 2018 को छोड़कर कभी भी भाजपा नहीं जीती। एक बार 1967 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी भी जीती। ऐसी सीटों में खरगोन जिले की अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित भगवानपुरा सीट पर कांग्रेस या निर्दलीयों का दबदबा रहा है। धार जिले की कुक्षी सीट भी परंपरागत रूप से कांग्रेस के पक्ष में रही है। खरगोन जिले की अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित भीकनगांव सीट पर भी भाजपा को कभी सफलता नहीं मिली। मुस्लिम बहुल भोपाल उत्तर सीट पर भाजपा सिर्फ 1993 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद के जीती। 2018 में फातिमा रसूल सिद्दीकी को उतारकर भी भाजपा सफल न हो सकी। छिंदवाड़ा जिले की चौरई सीट लंबे समय से कांग्रेस, विशेषकर कमल नाथ परिवार के प्रभाव क्षेत्र में रही है। एमपी की ऐसी ही कई सीटों पर अब बीजेपी जीत के लिए अभी से प्लान बनाकर तैयारी कर रही है।
क्लस्टर-रणनीति की मुख्य विशेषताएंः
माइक्रो-प्लानिंगः हारी हुई या कमजोर सीटों को 3-4 गांवों के क्लस्टर में बांटा गया है, जहां प्रत्येक क्लस्टर की निगरानी के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं या विधायकों को नियुक्त किया गया है।
दिग्गज नेताओं को जिम्मेदारीः कैलाश विजयवर्गीय (जबलपुर क्लस्टर), नरोत्तम मिश्रा (सागर), प्रहलाद पटेल (रीवा), जगदीश देवड़ा (इंदौर) जैसे कद्दावर नेताओं को क्लस्टर प्रभारी बनाकर उन क्षेत्रों में सक्रिय किया गया है।
लक्ष्य 51 प्रतिशत वोट शेयरः पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना है।
आदिवासी बेल्ट पर फोकसः विशेष रूप से 47 आरक्षित आदिवासी विधानसभा सीटों के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई है, जिसमें आदिवासी परिवारों से सीधे संपर्क साधा जा रहा है।
पन्ना प्रमुख सक्रियताः बूथ स्तर को मजबूत करने के लिए ’पन्ना प्रमुखों’ को सक्रिय किया जा रहा है और घर-घर संपर्क अभियान पर जोर दिया जा रहा है।
रणनीति का उद्देश्यः
यह रणनीति विशेष रूप से उन क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत करने के लिए है, जहां पार्टी लंबे समय से या जनसंघ के दौर से कमजोर रही है। इस योजना में स्थानीय संगठन इकाइयों के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं का सीधा संवाद सुनिश्चित किया गया है।

