भोपाल। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनएसीपी) के तहत मध्य प्रदेश के इन 8 शहरों की जिनमें ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली शामिल हैं, में वायु गुणवत्ता यानि कि एक्यूआई “बहुत खराब“ पाई जा रही है। पीथमपुर और मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी प्रदूषण की स्थित गंभीर बताई जाती है, जिससे फेफड़ों, आंखों में जलन और सांस संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
सुधार के लिए बनाई गई समिति
जो जानकारी आ रही है उसके तहत वायु गुणवत्ता खराब वाले शहरों में सुधार के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है। इसके लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति भी गठित की गई है, जो हर माह वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या प्रयास किए इसकी समीक्षा करती है। वायु गुणवत्ता सुधार के कार्य से जुड़े विभाग, पीडब्ल्यूडी, खाद्य नागरिक आपूर्ति, परिवहन, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर कार्य कर रहे हैं।
प्रदूषण के प्रमुख बिंदु
गंभीर स्थिति- ग्वालियर में एक्यूआई 300 के पार (180 औसत)।
प्रमुख प्रदूषित शहर- भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, देवास और सिंगरौली।
औद्योगिक हॉटस्पॉट- पीथमपुर (335) और मंडीदीप (321) में खतरनाक हवा।
स्वास्थ्य प्रभाव- आंखों में जलन, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, और सांस लेने में दिक्कत।
बचाव के उपाय
विशेषज्ञों ने सुबह की सैर से बचने की सलाह दी है।
बाहर निकलते समय एन-95 मास्क का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को घरों में रहने की सलाह दी गई है।

