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जीवन-मृत्यु को समझने की तपस्या है अघोर पंथ, आखिर कैसे होते है अघोरी बाबा

अघोरी बाबा। भगवान शिव के भैरव रूप के उपासक, अघोरी बाबा अपनी विशिष्ट जीवनशैली और कठिन साधना के लिए जाने जाते हैं। अघोर शब्द का शाब्दिक अर्थ है जो घोर न हो अर्थात जो अत्यंत सरल और सहज हो। अघोरी बनने की सबसे पहली शर्त है मन से घृणा को खत्म करना। जिन चीजों से मनुष्य जाति घृणा करती है,उन्हें अघोरी अपनाते है। अघोरी शब्द का संस्कृत में अर्थ उजाले की ओर बताया गया है। अघोरी बाबा जीवन-मृत्यु, पवित्र-अशुद्ध जैसी सामाजिक मान्यताओं से अलग रहकर साधना करते हैं. अघोर पंथ का उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना और सांसारिक मोह-माया से मुक्त होना है. अघोरी मृत्यु को अंतिम सत्य मानते हैं और इसलिए वे श्मशान घाट पर साधना करते हैं।

जाने कैसे होती है अधोरी बाबा की पहचान

असली अघोरी की पहचान उसके अंदरूनी स्वभाव (सरलता, निडरता, और घृणा-मुक्त मन) और बाहरी दिखावे (भस्म, कपाल, चिता-भस्म, श्मशान में साधना) के मेल से होती है, लेकिन मुख्य है कि वे शिव के भक्त होते हैं, समाज से अलग रहकर परमात्मा प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या करते हैं, न कि सिर्फ दिखावा या राक्षसी प्रवृत्तियों के लिए. वे हर बंधन से मुक्त, परम सत्य की खोज में रहते हैं और उनका मार्ग सरल होता है, भले ही बाहरी रूप से वे डरावने लगें।

जीवन-मृत्यु को समझने की तपस्या

अघोर पंथ एक गूढ़ परंपरा है। इसमें जीवन-मृत्यु के चक्र को समझने का प्रयास किया जाता है। अघोरी साधु इसी पंथ के अनुयायी होते हैं। वे श्मशान जैसी जगहों पर रहकर साधना करते हैं।उनका शव जलाया नहीं जाता, बल्कि उल्टा गाड़ा जाता है, खोपड़ी को तंत्र साधना के लिए रखा जाता है। इतना रहस्यमय कि सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

ऐसे होती है अघोर तपस्या

ईश्वर के प्रति समर्पण- वे भगवान शिव के अनन्य भक्त होते हैं और उनकी उपासना करते हैं, उनका लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति होता है।

मन की शुद्धता- असली अघोरी मन और हृदय से घृणा, मोह और विकारों को निकाल देते हैं; वे सरल और निडर होते हैं।

बंधन-मुक्त जीवन- वे समाज के बंधनों, आडंबरों और इच्छाओं से मुक्त होते हैं, जो उन्हें परम सत्य की ओर ले जाता है।

कठोर साधना- वे श्मशान में, चिता के पास बैठकर तपस्या करते हैं और शवों के साथ साधना करते हैं, जो कि परम सत्य की खोज का एक हिस्सा है (यह नरबलि या मांस-मदिरा का सेवन नहीं है).

भस्म और प्रतीकात्मक वस्तुएँ- शरीर पर श्मशान की राख लगाना, कपाल (खोपड़ी) का उपयोग करना उनके साधना का हिस्सा है, जो मृत्यु और जीवन के परे के सत्य का प्रतीक है।

अघोर का अर्थ- अघोर का अर्थ है जो घोर नहीं है या सरल, जो उनके मार्ग और स्वभाव को दर्शाता है, जिसमें हर तरह के डर और जटिलताओं से मुक्ति होती है।

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