Thakur Ranmat Singh College Rewa : रीवा में राष्ट्रीय संगोष्ठी,लोक साहित्य की भूमिका पर विद्वानों के महत्वपूर्ण विचार

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Thakur Ranmat Singh College Rewa : रीवा में राष्ट्रीय संगोष्ठी,लोक साहित्य की भूमिका पर विद्वानों के महत्वपूर्ण विचार-रीवा स्थित ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय (मध्यप्रदेश) के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी “समाज के विकास में लोक साहित्य की भूमिका” विषय पर आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए विद्वानों, शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए और लोक साहित्य की सामाजिक उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के आचार्य डॉ. अभिषेक अवस्थी के निर्देशन में हुआ। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में गुजरात के सरदार वल्लभभाई पटेल विश्वविद्यालय से पधारे डॉ. लक्ष्मीधर चौधरी ने लोक साहित्य को भारतीय समाज की आत्मा बताते हुए कहा कि लोक परंपराओं में हमारी संस्कृति, इतिहास और सामाजिक मूल्यों की गहरी झलक मिलती है। रीवा के ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय में हिंदी विभाग द्वारा आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में “समाज के विकास में लोक साहित्य की भूमिका” विषय पर देशभर से आए विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। जानिए कार्यक्रम की मुख्य बातें।

लोक साहित्य का समाज में महत्व

Importance of Folk Literature in Society

संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि लोक साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज की परंपराओं, जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने का माध्यम भी है। लोक गीत, लोक कथाएं, कहावतें और लोक परंपराएं समाज के अनुभवों और ज्ञान का जीवंत दस्तावेज होती हैं।

देशभर से आए विद्वानों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र

Scholars from Across the Country Presented Research Papers

कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए विद्वानों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने लोक साहित्य के सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक महत्व पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध पत्रों ने लोक साहित्य के विविध आयामों को सामने रखा।

रीवा के ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी लोक साहित्य के महत्व को रेखांकित करने के साथ-साथ शोधार्थियों और विद्वानों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।

साहित्य और समाज के संबंध पर हुई चर्चा

Discussion on the Relationship between Literature and Society

संगोष्ठी में वक्ताओं ने साहित्य और समाज के गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। लोक साहित्य समाज की जड़ों से जुड़ा होता है और यही कारण है कि यह पीढ़ी दर पीढ़ी सामाजिक चेतना को आगे बढ़ाता है।

विद्यार्थियों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी

Active Participation of Students and Researchers

कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शोधार्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। उन्होंने लोक साहित्य से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे और वरिष्ठ विद्वानों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। इससे युवा शोधकर्ताओं को लोक साहित्य के अध्ययन के लिए नई प्रेरणा मिलने की बात को स्वीकारा।

निष्कर्ष-रीवा के ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी लोक साहित्य के महत्व को रेखांकित करने के साथ-साथ शोधार्थियों और विद्वानों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि लोक साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि समाज की वर्तमान और भविष्य की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

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