Tej Pratap in Bihar Election : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में 121 सीटों के लिए मतदान सनपन्न हो चुका है। अब दूसरे चरण में 122 सीटों के लिए मतदान 11 नवंबर हो होना है। इस दौरान बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल में हर राजनीतिक बयान नए समीकरणों को जन्म दे रहा है। ख़ासकर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव सुर्खियां बटोर रहें हैं। तेज प्रताप यादव से जब पूछा गया कि उनकी पार्टी किसके साथ गठबंधन करेगी तो उन्होंने अपने बयान से सभी को चौंका दिया। उन्होंने कहा कि जो चुनाव जीतेगा, उसी के साथ चले जाएंगे। तेज प्रताप यादव का ये बयान राजद के लिए एक सियासी झटके से कम नहीं है।
तेज प्रताप ने कहा- जो जीतेगा उसका समर्थन करेंगे
तेज प्रताप यादव ने कहा कि 14 तारीख को जनता जो भी चुनती है, वह उसका समर्थन करेंगे, चाहे वह कोई भी हो। उनके इस बयान ने चुनावी समीकरणों में नई चर्चा को जन्म दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह उसी का साथ देंगे जो मुद्दों पर बात करेगा- जैसे रोजगार, पलायन रुकवाना, किसानों की समस्याओं का हल और राजनीतिक दल या नेता के बजाय जनता के हक की बात करेगा। उनका कहना है कि उनकी राजनीति किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि जनता की आवाज बनना है। उनका मकसद सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि जनता के हित में खड़ा होना है।
इन शर्तों पर तेज प्रताप देंगे समर्थन
जब तेज प्रताप यादव से पूछा गया कि क्या यह बयान एनडीए में शामिल होने का संकेत है, तो उन्होंने कहा कि राजनीति में दरवाजे बंद नहीं होते। अगर कोई दल बहुमत लेकर आता है और जनता के लिए काम करने का वादा करता है, तो वह समर्थन देने को तैयार हैं, लेकिन यह समर्थन शर्तों पर आधारित होगा और जनता के विकास के लिए ही होगा।
तेज प्रताप ने कहा- जनता सबसे बड़ी ताकत
तेज प्रताप यादव ने आगे कहा कि जनता सबसे बड़ी ताकत है, और 14 तारीख को ही तय होगा कि बिहार का भविष्य कौन संभालेगा। वह जनता के फैसले के साथ रहेंगे। यह बयान तेज प्रताप की ‘जनता समर्थक’ छवि बनाने की कोशिश माना जा रहा है, जो दल से ऊपर उठकर बिहार के हितों की बात कर रहा है।
पारंपरिक नीति से अलग है तेज की पार्टी
राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि तेज प्रताप यादव की पार्टी के विचार पारंपरिक नीति से थोड़ा अलग है। तेज प्रताप यादव की ये टिप्पणी बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर रही है। ये न केवल एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ये भी संकेत है कि चुनावी नतीजों के बाद गठबंधन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
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