टीईटी एग्जाम। शिक्षकों की परीक्षा को लेकर मध्यप्रदेश में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विभाग स्तर से टीईटी एग्जाम की तैयारी किए जाने की खबरें आ रही है तो वही शिक्षकों की धड़कने तेज हो गई है, क्योकि उन्हे अब खुद की दक्षता को प्रमाणित करने के लिए यह एग्जाम देना पड़ेगा, दरअसल मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद लगभग 1.5 लाख सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि कि टीईटी आयोजित करने की तैयारियों में तेजी से जुटा है। यह विशेष परीक्षा जुलाई या अगस्त 2026 में आयोजित होने की संभावना है, ताकि शिक्षकों के लिए योग्यता के मानक सुनिश्चित किए जा सकें।
परीक्षा की अनिवार्यता
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के अनुसार, सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर जो शिक्षक यह परीक्षा पास नहीं करेंगे, उनकी सेवा समाप्त भी की जा सकती है। लोक शिक्षण संचालनालय ने शिक्षक संगठनों को आश्वस्त किया है कि परीक्षा से पहले शिक्षकों को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे अपनी तैयारी बेहतर ढंग से कर सकें।
शिक्षक संगठनों का विरोध
राज्य के कई शिक्षक संगठनों ने इस अनिवार्य परीक्षा का कड़ा विरोध किया है। अध्यापकों का मानना है कि वर्षों की सेवा दे चुके पुराने शिक्षकों पर पात्रता परीक्षा थोपना उनके अधिकारों के साथ अन्याय है और इसे लेकर शिक्षक संघ लगातार ज्ञापन सौंप रहे हैं। शिक्षक संगठनों में चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कई संगठनों का कहना है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों के अनुसार हुई थीं. ऐसे में उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना उचित नहीं होगा। शिक्षक नेताओं का कहना है कि वे सेवा अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर सरकार से स्पष्ट नीति की मांग करेंगे।

